नील विद्रोह

  • इसका मुख्य कारण पूर्वी भारत में यूरोपिय नील बागान मालिकों द्वारा नील उत्पादन हेतु किसानों को  विवश करना था ।
  • 1860 में नदिया जिले के गोविंदपुर गांव में नील विद्रोह प्रारंभ हुआ और शीघ्र ही इसे पूरे बंगाल को अपने आगोश में ले लिया।
  • " हिंदू पैट्रियाट " के संपादक हरीश चंद्र मुखर्जी ने विशिष्ट भूमिका निभाई ।
  • इसका नेतृत्व दिगम्बर व विष्णु विश्वास नहीं किया ।
  • दीनबंधु मित्र ने नील दर्पण नामक नाटक की रचना कर कृषकों के उत्पीड़न को सजीव ढंग से चित्रत किया ।
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