उष्णकटिबंधीय चक्रवात

  • शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात की भांति उष्णकटिबंधीय चक्रवात भी निश्चित प्रक्रिया द्वारा निर्मित, विकसित एवं गतिशील होकर मौसम को प्रभावित करते हैं।
  • इन चक्रवातों का उद्भव 8 डिग्री से 15 डिग्री उत्तरी अक्षांश रेखाओं के मध्य होता है ।
  • इन का व्यास 500 से 800 किलोमीटर के मध्य होता है।
  • उष्ण कटिबंधीय चक्रवात के केंद्र में न्यूनतम वायुदाब 920 से 980 मिलीबार के मध्य होता है ।
  • इनकी गति 120 से 200 किलोमीटर प्रति घंटा होती है , जिस कारण इस चक्रवात को अत्यंत शक्तिशाली तथा विनाशकारी तूफान माना जाता है ।
  • उष्णकटिबंधीय चक्रवात उनकी ऊंचाई बहुत अधिक होती है यह लगभग 10,000 से 17,000 मीटर की ऊंचाई तक पाए जाते हैं।
  • उष्णकटिबंधीय चक्रवात जैसे पश्चिमी द्वीप समूह के निकट हरिकेन, हिंद महासागर में साइक्लोन , फिलीपींस, जापान एवं चीन में टाइफून  तथा ऑस्ट्रेलिया में विली विलीज के नाम से जाना जाता है । जापान तथा ताइवान में पृथक नाम ताइफू से भी संबोधित किया जाता है।
  • उष्णकटिबंधीय चक्रवात की निर्माण प्रक्रिया भिन्न है, जिस कारण इसके संरचनात्मक विशेषताएं शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात से भिन्न है।
  • इन चक्रवात के शीर्ष भाग में अर्ध्वगामी प्रभाव तथा धरातल के निकट वायु का चक्रधार केंद्रों मुखी प्रभाव होता है।
  • उष्ण कटिबंधीय चक्रवात  का मध्य भाग अत्यंत शांत क्षेत्र होता है। इसके ऊपर आकाश मेंघ रहित रहता है।
  • इस भाग को चक्रवात चक्षु कहा जाता है, इस भारत की सबसे बड़ी विशेषता है कि इसमें वायु का प्रवाह अत्यंत मंद एवं विभिन्न दिशाओं में होता है।
  • इस वृत्ताकार क्रोड प्रदेश का व्यास लगभग 22 से 30 किलोमीटर तक होता है, वास्तव में चक्रवात उष्णकटिबंधीय चक्रवात का अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है इसमें तापमान कम होता है।
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