भारत में प्राकृतिक वनस्पतियां
भारत में वन वर्षा का का अनुसरण करते हैं जिन भागों में भारी वर्षा होती है, वहां घने वन पाए जाते हैं।
👉उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन
यह भारत के उन भागों में पाए जाते हैं जहां 200 सेंटी मीटर से अधिक वर्षा होती है उत्तरी सह्याद्री प्रदेश में इन वनों को शोला वन कहते हैं । वर्ष भर हरे भरे रहने के कारण इन्हें सदाबहार वन भी कहते हैं।
इन वनों में मुख्य रूप से ताड़, महोगनी, नारियल, एबोनी, आबनूस, बांस एवं बेंत है ।यहां पर सिनकोना वृक्ष भी पाया जाता है।
ये वन असम, मेघालय, त्रिपुरा, मणिपुर, अंडमान, निकोबार द्वीप समूह, पश्चिमी घाट, पश्चिमी ढाल, हिमालय की तराई तथा कर्नाटक के पश्चिमी भागों में पाए जाते हैं। भारत में इस प्रकार के वन 45 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में पाए जाते हैं।
👉उष्णकटिबंधीय पतझड़ वन
इस प्रकार के वन 100 से 200 सेंटीमीटर वर्षा वाले क्षेत्र में पाए जाते हैं। इन वनों में साल, सगौन, शीशम, चंदन, आम, साखू, हल्दु के वृक्ष पाए जाते हैं।
इन वनों का विस्तार हिमालय के गिरी पद मध्य प्रदेश कर्नाटक छत्तीसगढ़ महाराष्ट्र तमिलनाडु उड़ीसा पश्चिमी बंगाल झारखंड उत्तर प्रदेश एवं उत्तरांचल में है
ये व्यवसायिक दृष्टि से सर्वाधिक महत्व वाले वन हैं।
ये वन भारत के 220 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में पाए जाते हैं।
ये वन भारत के सर्वाधिक क्षेत्र में विस्तृत हैँ।
👉 कटीले वन एवं झाड़ियां
इस प्रकार के वन भारत के शुष्क भागों में जहां वर्षा 50 सेंटीमीटर से कम होती है, वहां पाए जाते हैं यहां पर पाए जाने वाले वृक्षों की छाल मोटी तथा पत्तियों के साथ कांटे होते हैं मोटी छाल वृक्षों को गर्मी से रक्षा करती है यहां के प्रमुख वृक्ष बबूल, खैर, खजूर, नागफनी, कैक्टस, रोहिडा करील हैं।
इन वनों का विस्तार राजस्थान, गुजरात मध्य प्रदेश के इंदौर से आंध्र प्रदेश के कुर्नूल तक पठार के मध्य भाग में अर्धचंद्राकार पेटी तक है।
👉ज्वारीय वन
ये वन उन भागों में पाए जाते हैं जहां नदियों का ताजा जल समुद्री जल में मिलता है एवं परिणाम स्वरूप दलदली भाग बन जाते हैं गंगा, गोदावरी, कृष्णा आदि नदियों के निम्न डेल्टाई भाग इन वनस्पतियों के आदर्श उत्पत्ति क्षेत्र हैं यहां की प्रमुख वनस्पतियां मैग्रोव, सुंदरी, कैजुरीना, केवडा, बेंदी, गोरने, कैसुरिना, फोनिक्स के वृक्ष हैं।
ज्वारीय वन समुद्री कटाव को रोकते हैं एवं इनकी लकड़िया जल में सड़ती नहीं हैं।
👉पर्वतीय वन
ये वन हिमालय पर्वत पर उगते हैं, इनका विस्तार असम से कश्मीर तक है।