हर्यक वंश ( पितृहन्ता वंश )

बृहद्रथ-वंश के पश्चात मगध में जो नया राजवंश सत्ता में आया वह हर्यक वंश के नाम से विख्यात हुआ और जैन ग्रंथों में इस वंश को हर्यक वंश कहा गया है। इस वंश के संस्थापक बिंबिसार थे। इस वंश का महान प्रथम शासक बिंबिसार हुआ जिसने मगध साम्राज्य की नींव रखी थी।

1- बिंबिसार उपनाम श्रेणिय (544 ईसा पूर्व से 492 ईसा पूर्व तक) - 

जैन साहित्य में इसे श्रेणिय कहा गया है ।बिंबिसार मगध के पहले वंश हर्यक वंश का प्रथम शक्तिशाली शासक था। उसकी राजधानी गिरीव्रज या राजगृह थी । बिंबिसार ने विजयों तथा वैवाहिक संबंधों के द्वारा अपने वंश का विस्तार किया।

तीन राजवंशों में वैवाहिक संबंध-

प्रथम विवाह :     लिच्छवी गणराज्य के शासक चेटक की बहन चेलना या छलना के साथ विवाह किया।

द्वितीय विवाह :      कोशल नरेश प्रसेनजित की बहन महाकोशला से विवाह किया इसे दहेज में काशी का प्रान्त प्राप्त हो गया।

तृतीय विवाह :   मद्र देश की राजकुमारी क्षेेेमा से विवाह किया।

बिंबिसार ने अपने राज्य वैद्य जीवक को अवंती नरेश चण्ड प्रद्योत की पीलिया या पाण्डु नामक बीमारी को ठीक करने के लिए भेजा था ।जिससे मैत्री संबंध स्थापित हुए। बिंबिसार ने अंग देश के शासक ब्रह्म दत्त को पराजित कर उसे अपने राज्य में मिला लिया।

यह बौद्ध तथा जैन दोनों मतों का पोषक था ।इसने राजगृह नामक नवीन नगर की स्थापना की। इसकी हत्या इसके पुत्र अजातशत्रु ने कर दी थी।

Posted on by