2 - अजातशत्रु/कुणिक ( 492 ई.पू से 460 ई.पू तक ) -
अजातशत्रु का कोशल नरेश प्रसनजीत से युद्ध हुआ पहले तो प्रसनजीत की हार हुई परंतु बाद में दोनों में समझौता हो गया। प्रसनजीत ने अपनी पुत्री वाजिरा का विवाह अजातशत्रु से कर दिया। अजातशत्रु ने लिच्छवी गणराज्य की राजधानी वैशाली को जीतकर मगध साम्राज्य का हिस्सा बना लिया था। इस प्रकार काशी और वैशाली को मिला लेने के बाद मगध का साम्राज्य और विस्तृत हो गया।
यह बौद्ध और जैन दोनों मतों का पोषक था ।उसके शासनकाल में 8वें वर्ष में बुद्ध का महापरिनिर्वाण हुआ था। राजगृह में स्तूप का निर्माण करवाया था। इसके शासनकाल राजगृह की सप्तपर्णी गुफा की में प्रथम बौद्ध संगीति का आयोजन किया गया। इसकी हत्या इसके पुत्र उदयिन ने कर दी थी।
3- उदयिन या उदयभद्र (460 ईसा पूर्व से 444 ई.पू.)-
उदयिन गंगा और सोन नदियों के संगम पर पाटलिपुत्र की स्थापना की तथा राजगृह से अपनी राजधानी स्थानांतरित की। इसकी हत्या एक व्यक्ति ने छुरा भोंक कर दी थी।
उदयिन के बाद उसके तीन पुत्रों अनिरुद्ध, मुंडक और नागदशक ने क्रमवार राज्य किये।पुराणों अथवा कठकोश में नागदशक का एक नाम दर्शक मिलता है। बाद में जनता ने
इन पितृहंताओं को शासन से उतारकर शिशुनाग नामक एक योग्य अमात्य को राजा बनाया। इसी ने शिशुनाग वंश की नींव रखी।