गवर्नर जनरल
रावर्ट क्लाइव (1757-60ई0) प्लासी की विजय के बाद क्लाइव को बंगाल का प्रथम गर्वरन बनाया गया।
1765 से लेकर 1767ई0 तक वह पुनः बंगाल का गवर्नर बनकर आया था।
बंगाल में इसने द्वैध शासन की स्थापना की थी।
1765ई0 में मुगल साम्राट शाहआलम द्वितीय ने इलाहाबाद सन्धि के द्वारा अंग्रेजों को बंगाल, बिहार, उड़ीसा, की दीवानी प्रदान की।
1773-रेग्यूलेटिंग एक्ट के तहत वारेन हेस्टिग्स को बंगाल का प्रथम गर्वनर जनरल बनाया गया।
इसने द्वैध शासन व्यवस्था को समाप्त किया।
हेस्टिग्स ने प्रत्येक जिले में एक फौजदारी तथा दीवानी अदालतों का गठन किया।
1792ई0 मे जोनाथन डंकन ने बनारस में संस्कृत विद्यालय की स्थापना की।
लार्ड कार्नवालिस (1786-93-1805)
कार्नवालिस ने 1793ई0 मंे कार्नवालिस कोड का निर्माण करवाया जो शक्तियों के पृथक्करण सिद्वान्त पर आधारित था।
इसने 1793 में स्थायी बन्दोबस्त की पद्वति लागू की जिसके तहत जमीदारों को भूराजस्व का 10/11 भाग देना था। और 1/11 भाग अपने पास रखना था।
कार्नवालिस को भारत में नागरिक सेवा का जनक माना जाता है।
सर जानशोर ने अहस्तक्षेप नीति मैसूर के मामले में अपनायी थी।
लार्ड वेलेजली ने सहायक सन्धि की शुरूआत की। जिसने उसने सर्वप्रथम हैदराबाद मैसूर तंजौर को हस्ताक्ष़्ार के लिए बाध्य किया।
वेलेजली ने नागरिक सेवा में भर्ती किये गये युवकों के प्रशिक्षण के लिये 1800ई0 में फोर्ट विलियम कालेज की स्थापना कलकत्ता में की ।