संघ की राजभाषा

संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार  संघ राजभाषा के रूप में देवनागरी लिपि तथा हिंदी भाषा को स्वीकार किया गया है तथा उनको के अंतरराष्ट्रीय रूप को अपनाया गया है l इस अनुच्छेद के खंड (2) में यह व्यवस्था की गई कि संविधान के प्रारंभ में 15 वर्षों तक की अवधि तक संघ के सभी शासकीय प्रयोजनों हेतु अंग्रेजी भाषा का प्रयोग होता रहेगा । अनुच्छेद 344 के अंतर्गत निहित प्रावधानों के अनुसार राष्ट्रपति द्वारा 5 वर्षों के बाद तथा उसके बाद प्रत्येक 10 वर्षों की समाप्ति पर एक आयोग के गठन की व्यवस्था की गई है । प्रथम राज्यभाषा आयोग का गठन सन् 1955 में बी,जी,खेर की अध्यक्षता में किया गया । अनुच्छेद 120 सांसद की अधिकृत भाषा संबंधी प्रावधानों का उल्लेख किया गया है । इसके अनुसार संसद की हिंदी अथवा अंग्रेजी में किया जाएगा । संविधान के अनुच्छेद 348 के द्वारा उच्चतम न्यायाल और उच्च न्यायालय में एक  अधिनियमो  विधायकों आदि के लिए प्रयोग की जाने वाली भाषा के संबंध में प्रावधान किया गया है । इसके अनुसार जब तक संसद विधि द्वारा अन्यथा उपलब्ध न करें, तब तक उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों में सभी कार्यवाही अंग्रेजी भाषा में होगी तथा संघ एवं राज्यों के सभी विधायकों,संशोधन,अधिनियम, अध्यादेशों,आदेशों,नियमों के विनियमों तथा उपनियमों के प्राधिकृत पाठ भी केवल अंग्रेजी में होंगे ।
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