मध्यकाल में मुगल चित्रकला या आगरा शैली उत्तर प्रदेश की प्रमुख चित्रकला शैली थी आगरा में मुगलकालीन चित्रकला की न्यू, हुमायु ने रखी थी चित्रकला के मुगल शैली को आगरा शैली भी कहा जाता है उन्होंने अपने साथ फारस की मीर सैयद अली एवं ख्वाजा अब्दुल रशीद नामक दो चित्रकार लाया था अब्दुल रशीद ने चित्र गुलशन चित्रावली में संकलित है आईने अकबरी से यह प्रमाणित होता है कि अकबर ने चित्रकला एवं विकास तथा चित्रकारों को संरक्षण दिया था अकबर की काल की महत्वपूर्ण मुगल चित्रकला कृतियों दस्ताने अमीर हमजा तथा रमजान नामा में मिलती हैं सभी क्षेत्रों की रचना ललित मोहन सेन ने की थी उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जनपद में विंध्याचल के सदस्यों एवं गुफाओं से प्राप्त चित्रों को कंदरा अथवा मिर्जापुर शैली के चित्र की संज्ञा दी गई है मिर्जापुर शैली के चित्रों में आंखें वेद तथा बुद्ध की गतिविधियों के चित्र को अंकित किया गया है आगरा शैली के चित्रकारों में मीर सैयद अली अब्दुल रशीद बसावन दशक केशुदाश आदि प्रमुख हैं।
जहांगीर के काल में चित्रकला की मुगल शैली अपने चरमोत्कर्ष थी आचार्य रामचंद्र शुक्ल निम्न चित्र आकांक्षा पश्चाताप प्रतिशोध दुख स्वप्न दवा मौत की आंखें रोगी का स्वप्न विशेष अग्नि सृष्टि और ध्वंस पराजय की पीड़ा आदि।