यह युद्ध जय सिंह और शिवाजी के बीच बीच हुआ।
इस संधि के तहत शिवाजी को अपने 35 किलो में से 23 किलो मुगलों को देने पड़े और 12 खुद रखा।
शिवाजी को मुगलों के पक्ष में युद्ध करने के लिए बाध्य किया गया।
1660 ईस्वी में शिवाजी और औरंगजेब से मिलने आगरा पहुंचे जहां पर औरंगजेब ने उन्हें 5000 मनसबदारी के लाइन में खड़ा करा दिया।
जिससे शिवाजी नाराज हो गए तथा शिवाजी को कैद करके आगरा के जयपुर भवन में रखा गया।
जय सिंह के पुत्र राम सिंह ने शिवाजी को फलों की टोकरी के माध्यम से बाहर निकाला।
शिवाजी का हमशक्ल हिरोजी फर्जंद था जिसे शिवाजी के स्थान पर कैद खाने पर लिटा दिया गया।
1667 ईस्वी में शिवाजी को राजा की उपाधि से औरंगजेब विभूषित किया।
शिवाजी ने 1670 इसी में सूरत को दूसरी बार लूटा 1680 ईस्वी में संभाजी मराठा छत्रपति बना।
1681 में औरंगजेब अपने विद्रोही शहजादा अकबर द्वितीय का पीछा करता हुआ महाराष्ट्र पहुंचा।
वह फिर दोबारा उत्तर भारत वापस नहीं लौटाया 1689 में संभाजी उनके प्रधानमंत्री कवि कलश अकबर 2 संभाजी का साहू संगमेश्वर की पहाड़ी पर पकड़े गये।
कवि कलश तथा संभाजी को मौत के घाट उतार दिया गया।
अकबर द्वितीय को देश निकाला दे दिया गया साहू को गिरफ्तार करके आगरा फ्रेंच दिया गया जहां उसका पालन पोषण करने का कार्य औरंगजेब की पुत्री निशा ने लिया संभाजी के मरने के बाद गद्दी पर बैठा।
उसने 1689 से लेकर 100 तक औरंगजेब से युद्ध किया
ईस्वी में राजा राम की मृत्यु हो गई उसके पश्चात ताराबाई ने गद्दी संभाला।
1700 से 1707 तक मराठों का स्वतंत्रता संग्राम ताराबाई के द्वारा लड़ा गया।