औरंगजेब की धार्मिक नीति

औरंगजेब एक धर्म लिस्ट मुसलमान था उसको बाहरी अलंकरण और वयस्क में कोई रुचि नहीं थी।

उसके जीवन के भोग विलास को विवाह गली देकर कर्तव्य निष्ठ था

राजकाज के मामले में ना ही अपने साथ समझौता करता था ना ही अधिकारियों के साथ औरंगजेब की धार्मिक नीतियों के बीच विद्वानों में मतभेद है।

औरंगजेब की धार्मिक नीति एक असहिष्णु की नीति थी

उसने सहिष्णुता की नीति को त्याग कर धर्मांधता की नीति को अपनाया धार्मिक कट्टरता से वशीभूत होकर उसने इस्लाम वालों पर अत्याचार किया।

उसने हिंदुओं पर जजिया कर लगाया यात्रा कर लगाया तथा उज्जैन के महाकाल मथुरा के केशव राय तथा काशी में विश्वनाथ की मंदिर को तोड़ने का आदेश दे दिया।

औरंगजेब ने 1679 इसी में जाकर को लागू किया था।

औरंगजेब ने संगीत चित्रकला इत्यादि पर प्रतिबंध लगा दिया था कई इतिहासकारों ने औरंगजेब को आना है।

उसने बताया है कि औरंगजेब भारत में राजनीतिक एकता स्थापित करना चाहता था।

इसी कारण या राज्यों राजपूतों हिंदुओं के प्रति नीति अपनाई उसका कारण राजनीतिक और धार्मिक था।

औरंगजेब ने हिंदू मंदिरों को जागी रे तथा वहीं मंदिरों को गिराया जहां मस्जिद थी।

उसने हिंदुओं को भी अन्य मनसबदारी पद पर तैनात किया।

इसके शासनकाल में सर्वाधिक मनसबदारी औरंगजेब वीणा बजाने का शौकीन था।

औरंगजेब के शासनकाल में इतिहास में सबसे अधिक पुस्तक लिखी गई।

औरंगजेब ने उज्जैन के महाकाल मंदिर चित्रकूट के मंदिर तथा इलाहाबाद के मंदिरों को मरम्मत कराने के लिए अनुदान दिया।

औरंगजेब ने लागू किया लेकिन महिलाएं बच्चे विकलांग ब्राह्मण और मजदूरों से नहीं लिया गया।

इसी में औरंगजेब ने दक्षिण विजय की उपलक्ष में जजिया कर की वसूली को बंद करवा दिया था।

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