इस्लाम धर्म के प्रवर्तक हजरत मोहम्मद साहब थे इनका जन्म 570 ईसवी में मक्का में हुआ ।
इनके पिता का नाम अब्दुल्ला था।जो कुरेशी जिला के रहने वाले थे।
मोहम्मद साहब जब 6 वर्ष के थे तब उनके माता पिता का निधन हुआ था।
इनके चाचा अबू तालिब ने इसका पालन पोषण किया था।
25 वर्ष की अवस्था में खदीजा नामक विधवा महिला का व्यापारिक प्रतिनिधि चुने गए।
खदीजा पैगंबर मोहम्मद साहब के व्यक्तिगत से अत्यधिक प्रभावित थी इसी कारण उसने से विवाह कर लिया।
पैगंबर मोहम्मद साहब के 2 पुत्र तथा चार कन्या उत्पन्न हुए।
एक कन्या फातिमा का विवाह अबू तालिब के पुत्र अली सेहुआ जो इस्लाम के चौथे खलीफा बने।
मोहम्मद साहब को ज्ञान की प्राप्ति मक्का के हीरा नामक गुफा में हुआ।
मोहम्मद साहब ने सर्वप्रथम अपना उपदेश अपनी पत्नी खादी जा को दिया।
वहीं उनकी पहली शिष्या बनी मोहम्मद साहब ने काबा में पहले हुए मूर्ति पूजा का निंदा किया जिससे उनका कुरेशी कबीला तबाह हो गया।
इसी कारण 622 इसी में मक्का छोड़कर मदीना जाना पड़ा।
इसी 622e सी ईस्वी को हिजरी संवत के नाम से जाना जाता है।
मदीना में मोहम्मद साहब के अनुयायियों की संख्या बढ़ी।
मदीना में लोगों ने अपनी सेना बनाई और मक्का पर आक्रमण कर दिया तथा वहां के लोगों को इस्लाम धर्म में परिवर्तित किया गया 632 साहब की मृत्यु हो गई।
इस्लाम धर्म के अनुयायियों को मुसलमान कहा गया तथा इनके पवित्र ग्रंथ को कुरान कहा गया।
पैगंबर मोहम्मद साहब के अनुयायियों के प्रमुख को खलीफा कहा गया।
632 ईसवी में मदीना की जनता ने युवक को पहला खलीफा नियुक्त किया। उम्र उस्मान और अली खलीफा हुआ।
अली मोहम्मद साहब के धमाके खलीफा ओं के विचार को मारने पर इस्लाम धर्म दो संप्रदायों में मर गया पहला सुन्नी और दूसरा सिया था।
लोकतंत्र पर विश्वास रखता था और सुन्नी संप्रदाय मोहम्मद साहब को मारने के साथ साथ चारों खलीफा को भी मानता है।