शिया संप्रदाय

यह वंशानुगत पर विश्वास रखता है और मोहम्मद साहब और चौथे खलीफा अली को मानता है।

खलीफा ओं के नेतृत्व में ही इस्लाम धर्म का विस्तार हुआ।

712 इसी में मोहम्मद बिन कासिम ने सिंध पर आक्रमण किया और वहां के राजा दाहिर को पराजित कर इस्लाम धर्म की स्थापना की दक्षिण भारत में धार्मिक कला की ज्वाला धधक रही थी।

किंतु उधर जैन धर्म और बौद्ध धर्म के प्रभाव को समाप्त कर उनको अपने अंतर्गत लेने का प्रयास कर रहा था इसी समय केरल के निम्न जाति के लोग इस्लाम धर्म के अनुयाई बने।

9 वीं शताब्दी में मालाबार तट का राजा चेहरा मन निर्मल भी इस्लाम धर्म का अनुयाई हो गया उसका नाम अब्दुल रहीम शामली रखा गया।

इस समय केरल का राजा जम्मू रिंग भी मुसलमान यात्रियों को सुविधाएं प्रदान करता था ।

जमोरिन ने आदेश जारी किया था कि मल्लाह परिवार के लोगों के पुरुष को इस्लाम धर्म में परिवर्तित जाए के आगमन के साथ साथ मुस्लिम संत भी आया करते थे।

मुस्लिम संतों ने भारत में वास्तविक रूप से इस्लाम को स्थापित करने का प्रयास किया।

सूफी संतों ने हुजविरी का नाम महत्वपूर्ण है इन्होंने कश्क अल महजुब की रचना किया।

महमूद गजनवी के आक्रमण के पश्चात हुजूरी लाहौर में रहने लगे तथा वहीं पर उन्होंने अपना खानकाह स्थापित किया।

1190 ईस्वी में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भारत आए।

सर्वप्रथम वे लाहौर के खोज विधि के शासन काल में रुके।

ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती लाहौर से दिल्ली और दिल्ली से अजमेर पहुंचे।

अजमेर में बाबा रामदेव जोगी ने इनका विरोध किया लेकिन इनके प्रभाव में आकर इस्लाम धर्म के अनुयाई बन गए।

यहीं पर मोइनुद्दीन चिश्ती का मजार भी स्थापित किया गया।

धीरे-धीरे करके भारत में इस्लाम धर्म का प्रभाव पड़ता गया।

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