इसकी शुरुआत इस्लाम के आगमन के साथ हुआ इस्लामी धर्म में प्रारंभिक शिक्षा मकतब में दिए जाते थे जबकि मदरसा शिक्षा के उच्च केंद्र हुआ करते थे।
मकतब अधिकांश निजी व्यक्ति द्वारा संचालित किया जाता था इस्लाम धर्म के अनुसार जब बालक 4 साल 4 माह 4 दिन का हो जाता था उसको बिस्मिल्लाह यह रहीम कराया जाता था।
सुल्तान महमूद गजनवी 1 उच्च कोटि के मदरसा की स्थापना किया था उस के समय में गजनी शिक्षा का प्रसिद्ध केंद्र बन गया था गजनवी ने गजनी में एक पुस्तकालय की स्थापना करवाया था।
गजनवी के प्रधानाचार्य उन सूरी की नियुक्ति किया महमूद के उत्तराधिकारी यों ने अपनी राजधानी लाहौर को बनाया और लाहौर शिक्षा का केंद्र बन गया।
जब मोहम्मद गौरी ने लाहौर के स्थान पर दिल्ली को राजधानी के रूप में अपनाया तो दिल्ली इस्लामिक शिक्षा का केंद्र बन गया गौरी ने अजमेर में अनेक मदरसा की स्थापना किया था जो अपने आप में निरालो कलाकृतियों से बना था।
सुल्तान इल्तुतमिश में मोहम्मद गौरी के नाम पर मदरसा ए जी की स्थापना की बदायूं में भी इसी के नाम पर एक मदरसा की स्थापना की गई थी जो उत्तर भारत में इस्लामी संस्कृति का दूसरा केंद्र बन गया।
इसके अतिरिक्त नसरुद्दीन वाचा ने भी एक मदरसा की स्थापना किया नसीरुद्दीन महमूद स्वयं विद्वान था और विद्वानों का आश्रय दाता था इसके वजीर बने मदरसा ए ना सीरिया नामक पुस्तक की रचना किया मदरसा का प्रधानाचार्य सिराज को नियुक्त किया वजीर के रूप में सुल्तान के रूप में शिक्षा को प्रोत्साहित किया बलबन का राजस्व सिद्धांत काफी कठोर था।
किंतु फिर भी वह शिक्षा के साथ जाता था और उसके साथ बोधन किया करता था उनका दरबार योग्य व्यक्तियों को एवं विद्वानों तथा दार्शनिक के लिए प्रसिद्ध था।
इनमें अमीर हसन और अमीर खुसरो के नाम विशेष उल्लेखनीय है इसके अतिरिक्त दरबार में न्याय शास्त्री गणितज्ञ आदि मौजूद थे।
खिलजी वंश के शासन काल में भी शिक्षा की उन्नति हुई सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ने हौज खास एक मदरसा का निर्माण करवाया आगे चलकर का पुनर्निर्माण के द्वारा करवाया गया था उसने भी मदरसा ए फिरोजशाही की स्थापना किया।