भारत में फारसी साहित्य का विकास मुस्लिम विजेताओं के आगमन से शुरू होता है सर्वप्रथम भारत में लोहा और आरसी विकास का केंद्र बिंदु रहा है।
लाहौर में प्रथम फारसी कवि दुला रोज वेता गजनवी वंश के शासन काल में फारसी साहित्य का विकास होता रहा दिल्ली सल्तनत के स्थापना के पश्चात फारसी को राज्यसभा में राजभाषा का दर्जा प्रदान किया गया।
इसी प्रकार दिल्ली तथा उसके स्थानों के निकट में भी फारसी का अचार बढ़ने लगा सुल्तान इल्तुतमिश विद्वानों और लेखकों को संरक्षण प्रदान करता था उस के दरबार में हसन निजामी निवास करता था।
जिसने ताजुल मासिर नामक पुस्तक की रचना किया नसीरुद्दीन मुहम्मद शिक्षा प्रेमी था प्रसिद्ध कवि फखरुद्दीन लूना की उस के दरबार में निवास करता था।
फकीर उद्दीन नूना की आमिर नाम से फारसी भाषा में अनुवाद करता था नसीरुद्दीन महमूद के दरबार में मिनहाज उस सिराज निवास करता था जिसके तबकात ए नासिर प्रसिद्ध ग्रंथ की रचना किया।
था बलबन का शासन काल विद्वानों कवियों यादी के संरक्षण का काल था उसका शासन काल भारत में ही नहीं बल्कि इस्लामी देशों में भी इस्लामी संस्कृति का प्रमुख माना जाता था।
अमीर खुसरो और अमीर हसन देहलवी ने अपने दरबार की शुरुआत किया अमीर खुसरो ने फारसी को भारतीय पर्यावरण में डालने का प्रश्न किया।
अमीर खुसरो की महत्वपूर्ण पुस्तक नूह सीपीहर आशिकाना गुरुकुल कमाल मजनू लैला तारीखे दिल्ली तुगलकनामा किसने दिल्ली सल्तनत के आठ सुल्तानों का काल देखा था।
अमीर खुसरो ने नूर से हर नामक पुस्तक में भारत की तुलना के उद्यानों से की है I इसी के काल में हंसी में जवा पूर्ण एवं मधुर गजलों की रचना भी किया था।
अमीर हसन देहलवी ने गुरु के वार्तालाप पर कवायद पुल फवाद लिखी अमीर हसन को भारत का भारत का सदी भी कहा जाता है I
मोहम्मद बिन तुगलक के शासन काल में भद्र एजाज नामक प्रसिद्ध कवि निवास करता था इसी समय मोहम्मद दूसरा मी द्वारा अतुल उस सलातीं नामक महत्वपूर्ण पुस्तक लिखा था।