मनोविज्ञान वह शैक्षिक व अनुप्रयोगात्मक विद्या है जो प्राणी (मनुष्य, पशु आदि) के मानसिक प्रक्रियाओं (mental processes), अनुभवों तथा व्यक्त व अव्यक्त दाेनाें प्रकार के व्यवहाराें का एक क्रमबद्ध तथा वैज्ञानिक अध्ययन करती है। दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि मनोविज्ञान एक ऐसा विज्ञान है जो क्रमबद्ध रूप से (systematically) प्रेक्षणीय व्यवहार (observable behaviour) का अध्ययन करता है तथा प्राणी के भीतर के मानसिक एवं दैहिक प्रक्रियाओं जैसे - चिन्तन, भाव आदि तथा वातावरण की घटनाओं के साथ उनका संबंध जोड़कर अध्ययन करता है। इस परिप्रेक्ष्य में मनोविज्ञान को व्यवहार एवं मानसिक प्रक्रियाओं के अध्ययन का विज्ञान कहा गया है। 'व्यवहार' में मानव व्यवहार तथा पशु व्यवहार दोनों ही सम्मिलित होते हैं। मानसिक प्रक्रियाओं के अन्तर्गत संवेदन (Sensation), अवधान (attention), प्रत्यक्षण (Perception), सीखना (अधिगम), स्मृति, चिन्तन आदि आते हैं।
मनोविज्ञान अनुभव का विज्ञान है, इसका उद्देश्य चेतनावस्था की प्रक्रिया के तत्त्वों का विश्लेषण, उनके परस्पर संबंधों का स्वरूप तथा उन्हें निर्धारित करनेवाले नियमों का पता लगाना है।
परिभाषाएँ
मनोविज्ञान की परिभाषायें :-
वाटसन के अनुसार, " मनोविज्ञान, व्यवहार का निश्चित या शुद्ध विज्ञान है।"
मैक्डूगल के अनुसार, " मनोविज्ञान, आचरण एवं व्यवहार का यथार्थ विज्ञान है "
वुडवर्थ के अनुसार, " मनोविज्ञान, वातावरण के सम्पर्क में होने वाले मानव व्यवहारों का विज्ञान है।"
क्रो एण्ड क्रो के अनुसार, " मनोविज्ञान मानव–व्यवहार और मानव सम्बन्धों का अध्ययन है।"
बोरिंग के अनुसार, " मनोविज्ञान मानव प्रकृति का अध्ययन है।"
स्किनर के अनुसार, " मनोविज्ञान, व्यवहार और अनुभव का विज्ञान है।"
मन के अनुसार, "आधुनिक मनोविज्ञान का सम्बन्ध व्यवहार की वैज्ञानिक खोज से है।"
गैरिसन व अन्य के अनुसार, " मनोविज्ञान का सम्बन्ध प्रत्यक्ष मानव – व्यवहार से है।"
गार्डनर मर्फी के अनुसार, " मनोविज्ञान वह विज्ञान है, जो जीवित व्यक्तियों का उनके वातावरण के प्रति अनुक्रियाओं का अध्ययन करता है। "
स्टीफन के अनुसार, "शिक्षा मनोविज्ञान शैक्षणिक विकास का क्रमिक अध्ययन है।"
ब्राउन के अनुसार, "शिक्षा के द्वारा मानव व्यवहार में परिवर्तन किया जाता है तथा मानव व्यवहार का अध्ययन ही मनोविज्ञान कहलाता है। "
क्रो एण्ड क्रो के अनुसार, "शिक्षा मनोविज्ञान, व्यक्ति के जन्म से लेकर वृद्धावस्था तक के अनुभवों का वर्णन तथा व्याख्या करता है।"
स्किनर के अनुसार, "शिक्षा मनोविज्ञान के अन्तर्गत शिक्षा से सम्बन्धित सम्पूर्ण व्यवहार और व्यक्तित्व आ जाता है।"
कॉलसनिक के अनुसार, "मनोविज्ञान के सिद्धान्तों व परिणामों का शिक्षा के क्षेत्र में अनुप्रयोग ही शिक्षा मनोविज्ञान कहलाता है।"
सारे व टेलफोर्ड के अनुसार, "शिक्षा मनोविज्ञान का मुख्य सम्बन्ध सीखने से है। यह मनोविज्ञान का वह अंग है जो शिक्षा के मनोवैज्ञानिक पहलुओं की वैज्ञानिक खोज से विशेष रूप से सम्बन्धित है।"
किल्फोर्ड के अनुसार, "बालक के विकास का अध्ययन हमें यह जानने योग्य बनाता है कि क्या पढ़ायें और कैसे पढाये। "
स्किनर के अनुसार, "मानव व्यवहार एवं अनुभव से सम्बंधित निष्कर्षो का शिक्षा के क्षेत्र में प्रयोग शिक्षा मनोविज्ञान कहलाता है। "
जे.एम. स्टीफन के अनुसार, "शिक्षा मनोविज्ञान शैक्षिक विकास का क्रमिक अध्ययन है। "
ट्रो के अनुसार, शिक्षा मनोविज्ञान शैक्षिक परिस्थितियों के मनोविज्ञान पक्षों का अध्ययन है। "
बी एन झा के अनुसार, "शिक्षा की प्रकिया पूर्णतया मनोविज्ञान की कृपा पर निर्भर है। "
एस एस चौहान के अनुसार, "शिक्षा मनोविज्ञान शैक्षिक परिवेश में व्यक्ति के विकास का व्यवस्थित अध्ययन है।"
पेस्टोलोजी के अनुसार, "शिक्षा मनुष्य की क्षमताओं का स्वाभाविक, प्रगतिशील तथा विरोधहीन विकास है।"
जॉन डीवी के अनुसार, "शिक्षा मनुष्य की क्षमताओं का विकास है , जिनकी सहायता से वह अपने वातावरण पर नियंत्रण करता हुआ अपनी संभावित उन्नति को प्राप्त करता है।"
जॉन एफ.ट्रेवर्स के अनुसार, "शिक्षा मनोविज्ञान वह विज्ञान है ,जिसमे छात्र , शिक्षण तथा अध्यापन का क्रमबद्ध अध्ययन किया जाता है।"
स्किनर के अनुसार, "शिक्षा मनोविज्ञान का उद्देश्य शैक्षिक परिस्थति के मूल्य एवं कुशलता में योगदान देना है।"
प्राक्-वैज्ञानिक काल (pre-scientific period) में मनोविज्ञान, दर्शनशास्त्र (Philosophy) का एक शाखा था। जब विल्हेल्म वुण्ट (Wilhelm Wundt) ने 1871 में मनोविज्ञान की पहला प्रयोगशाला खोला, मनोविज्ञान दर्शनशास्त्र के चंगुल से निकलकर एक स्वतंत्र विज्ञान का दर्जा पा सकने में समर्थ हो सका।