वस्तु एवं सेवा कर(GST)

वस्तु एवं सेवा कर प्रणाली (जीएसटी) लागू होने से उपर्युक्त केंद्र-राज्य कर बटवारा प्रणाली में बदलाव आ गया है। यह कर पूरे देश के लिए एक अप्रत्यक्ष कर के रूप में कार्य करेगा। जीएसटी के अंतर्गत जहां केंद्रीय स्तर पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क, अतिरिक्त उत्पाद शुल्क, सेवा कर, विशेष अतिरिक्त सीमा शुल्क (SAD), काउंटरवेलिंग ड्यूटी जैसे अप्रत्यक्ष कर शमिल होंगे राज्यों में लगाए जाने वाले मूल्यवर्ध्दन कर/विक्रय कर, मनोरंजन कर चुंगी तथा प्रवेश शुल्क, विलासिता कर, केंद्रीय विक्रय कर, लाटरी तथा सट्टेबाजी पर तथा सट्टेबाजी पर कर, इत्यादि भी (जीएसटी) के अंतर्गत सम्मिलित हो गए हैं । इस कर के संबंध में सर्वप्रथम 2003 में अप्रत्यक्ष कर पर गठित केलकर टास्क फोर्स ने वैट(VAT) के सिद्धांत पर आधारित एक राष्ट्रव्यापी 'वस्तु एवं सेवा कर' का सुझाव दिया था। विभिन्न चुनौतियों के बाद दिसंबर 2014 में लोकसभा में 122 वें संविधान संशोधन विधेयक के रूप में इसे पेश किया गया तथा मई 2015 को पारित कर दिया गया विभिन्न राजनैतिक दलों के मध्य आम सहमति बनने के पश्चात अगस्त 2016 में इसे राज्यसभा के द्वारा भी पारित कर दिया गया चूँकि यह मामला देश के संघीय ढांचे से संबंधित है इसलिए अनुच्छेद 368 के अनुसार राज्यसभा से पास होने के बाद इसे कम से कम आधी विधानसभाओं से अनुमोदित होने की आवश्यकता थी आवश्यक विधानसभाओं द्वारा अनुसमर्थन मिलने के पश्चात इसे राष्ट्रपति  की भी अनुमति प्राप्त हो गई तथा या 101 वें संविधान संशोधन अधिनियम के रूप में अधिसूचित हो गया इसके तहत संशोधित संविधान अनुच्छेद 279क के अनुसार (जीएसटी) काउंसिल का भी गठन हो चुका है। (जीएसटी) कर प्रणाली 1 जुलाई 2017 से लागू हो गई है।
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