धीरू भाई अम्बानी का जीवन परिचय

   धीरु भाई अम्बानी का जन्म 28 दिसम्बर 1932 को हुआ था।  इनका पूरा नाम धीरजलाल हीरालाल अम्बानी था। जिनको आज हम सभी धीरूभाई अम्बानी के नाम से जानते हैं। भारत के एक चिथड़े से धनी व्यावसायिक टाइकून बनने की कहानी है जिन्होनें रिलायंस उद्योग की स्थापना मुम्बई में अपने चचेरे भाई के साथ की। कई लोग अंबानी के भूतपूर्व और उल्लेखनीय विकास के लिए पूंजीवाद और सत्तारूढ़ राजनीतिज्ञों तक उनकी पहुँच को मानते हैं क्योंकि ये उपलब्धि अति दमनकारी व्यावसायिक वातावरण में पसंदीदा वर्ताव द्वारा प्राप्त की गई थी। अंबानी ने अपनी कंपनी रिलायंस को 1977 में सार्वजानिक क्षेत्र में सम्मिलित किया और 2007 तक परिवार दोनों बेेटों की सयुंक्त धनराशी 100 अरब डॉलर थी, जिसने अम्बानी को विश्व के धनी परिवारों में से एक बना दिया।

जब वे सोलह वर्ष के थे तो एडन, यमन चले गए। उन्होंने अ. बेस्सी और कं. (A. Besse & Co.)  के साथ 300 रूपये के वेतन पर काम किया। दो साल उपरांत, अ.बेस्सी और कं. शेल (Shell) उत्पादन के वितरक बन गए और एडन (Aden) के बंदरगाह पर कम्पनी के एक फिल्लिंग स्टेशन के प्रबंधन के लिए धीरुभाई को पदोन्नति दी गई।

     1958 में धीरुभाई अम्बानी भारत वापस आ गए और 15000.00 की पूंजी के साथ रिलायंस वाणिज्यिक निगम (Relianc Commercial Corporation) की शुरुआत की। रिलायंस वाणिज्यिक निगम का प्राथमिक व्यवसाय पोलियस्टर के सूत का आयात और मसालों का निर्यात करना था।

     वे अपने दुसरे चचेरे भाई चंपकलाल दिमानी (Champaklal Damani) जो उनके साथ ही एडन (Aden) यमन में रहा करते थे, के साथ साझेदारी में व्यवसाय शुरू की। रिलायंस वाणिज्यिक निगम का पहला कार्यालय मस्जिद बन्दर  (Masjid Bunder) के नर्सिनाथ सड़क पर स्थापित हुयी। यह एक टेलीफोन, एक मेज़ और तीन कुर्सियों के साथ एक 350 वर्ग फुट का कमरा था। शुरू में उनके व्यवसाय में मदद के लिए दो सहायक थे। 1955 में, चंपकलाल दिमानी और धीरुभाई अंबानी की साझेदारी खत्म हो गयी और धीरुभाई ने स्वयं शुरुआत की। यह माना जाता है कि दोनों के स्वभाव अलग थे और व्यवसाय कैसे किया जाए इस पर अलग राय थी। जहां पर श्री दमानी एक सतर्क व्यापारी थे और धागे के फैक्ट्रियों/भंडारों के निर्माण में विश्वास नहीं रखे थे, वहीं धीरुभाई को जोखिम लेनेवाले के रूप में जानते थे और वे मानते थे कि मूल्य वृद्धि कि आशा रखते हुए भंडारों का निर्माण भुलेश्वर, मुंबई के इस्टेट में किया जाना चाहिए, ताकि लाभ कमाया जाए । 1968 में वे दक्षिण मुंबई के अल्टमाउंट सड़क को चले गए। 1960 तक अंबानी की कुल धनराशि 10 लाख रूपये आंकी गयी। धीरूभाई अंबानी की मृृत्यु 6 जुलाई 2002 को 69 साल की उम्र में हुई ।

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