गुप्तोत्तर काल के वंश तथा राज्य - ( हर्षवर्धन 606 ई. - 467ई.)

हर्षवर्धन - हर्षवर्धन का जन्म 591 ईसवी में लगभग हुआ था वह प्रभाकर वर्धन का छोटा पुत्र था बड़े भाई हर्षवर्धन की मृत्यु के बाद हर्षवर्धन थानेश्वर के राज्य सिंहासन पर आसीन था जिसमें हर्षवर्धन थानेश्वर के राज्य सिंहासन पर बैठा उस समय राज्य की स्थिति काफी शंकरपुर थी कि बंगाल के गौड़ नरेश शशांक द्वारा उसके भाई का वध कर दिया गया था और उसकी बहन राज्यश्री अपने बाढ़ तथा प्राण बचाने के लिए अज्ञातवास को चली गई थी।

हर्षवर्धन एक बौद्ध भिक्षु दिवाकर मित्र की सहायता में अपनी बहन राज्यश्री को ढूंढ निकाला और नरेश शशांक ने हर्षवर्धन के कन्नौज आगमन की सूचना दी सूचना से बिना युद्ध की यही कन्नौज खाली कर दिया। क्योंकि कन्नौज नरेश ड्रीम वर्मा का कोई पुत्र नहीं था। अतः कन्नौज के मंत्रियों ने हर्ष के कन्नौज के राज्य सिंहासन पर बैठने का आग्रह किया किंतु वर्ष अस्वीकार कर दिया हर्ष ने स्वयं को राज्य पुत्र कहा और राज्यश्री को ही कन्नौज का सच क्या बनाया।

चीनी स्रोतों के ज्ञात होता है कि हर्ष एवं राज्यश्री साथ-साथ कन्नौज के सिंहासन पर बैठते थे हर्ष ने अपनी राजधानी थानेश्वर से कन्नौज स्थानांतरित कर ली थी ताकि वह राज्यश्री को प्रशासनिक कार्यों में पूरी सहायता दे सकें।

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