क्रय मूल्य - कोई वस्तु जितने रुपए में खरीदी जाती है वह उस वस्तु का क्रय मूल कहलाता है |
⇒विक्रय मूल्य - जिस मूल्य पर कोई वस्तु बेची जाती है वह मूल्य उस वस्तु का विक्रय मूल्य कहलाता है विक्रय मूल्य क्रय मूल्य से अधिक व कम हो सकता है |
⇒लाभ - लाभ की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब विक्रय मूल्य क्रय मूल्य से अधिक होता है|
लाभ = विक्रय मूल्य - क्रय मूल्य
लाभ प्रतिशत = (लाभ /क्रय मूल्य) ×100
⇒हानी - हानी की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब विक्रय मूल्य क्रय मूल्य से कम होता है|
हानी = क्रय मूल्य - विक्रय मूल्य
हानी प्रतिशत = (हानी /क्रय मूल्य) ×100
⇒बट्टा - जब कोई दुकानदार किसी वस्तु के अंकित मूल्य पर कुछ छूट देता है तो वह छूट ही बट्टा कहलाता है|
विक्रय मूल्य = अंकित मूल्य - बट्टा
⇒क्रमिक बट्टा- किसी वस्तु के अंकित मूल्य पर दो या दो से अधिक प्रकार की दी गई छूट को क्रमिक बट्टा कहते हैं |
जैसे- किसी ग्राहक को 100 रूपये के अंकित मूल्य वाली वस्तू पर लगातार 10 % व 15 % छुट देना क्रमिक बट्टा कहलायेगा |
⇒यदि x वस्तुओं का क्रय मूल्य y वस्तुओं के विक्रय मूल्य के समान हो तो प्रतिशत लाभ /हानि
= 
यदि इसका मान धनात्मक आता है तो प्रतिशत लाभ होगा |
यदि इसका मान ऋणात्मक आता है तो प्रतिशत हानि होगी |
⇒यदि दो वस्तुओ का विक्रय मूल्य समान हो तथा अक वस्तु x% लाभ एवं दूसरी वस्तु x% हानि पर बेचीं जाती है तो अंततः कुल सौदे पर हानि प्रतिशत = x ^2 /100 %
⇒यदि a वस्तुओ को b रूपये में खरीदकर c वस्तुओ को d रूपये में बेचा जाय तो
% लाभ = 
% हानि =
⇒यदि a वस्तुओ को b रूपये में खरीदकर b वस्तुओ को a रूपये में बेचा जाय तो
% लाभ =
% हानि =
⇒यदि x वस्तुओ को बेचकर y वस्तुओ के विक्रय मूल्य के बराबर लाभ या हानि प्राप्त होती हो तो प्रतिशत लाभ या हानि = 
⇒किसी वस्तु का अंकित मूल्य z दिया हो तथा उस पर x % तथा y% के दो बट्टे दिए जाए तो वस्तु का विक्रय मूल्य =
⇒A किसी वस्तु को r1 % लाभ / हानि पर B को बेचता है B ने उसे C को r2% लाभ / हानि पर बेच दिया C ने उसे D को r3 % लाभ / हानि पर बेच दिया | यदि D ने उसे वस्तु को x रूपये में खरीदा हो तो A का क्रय मूल्य = 