इसके लेखक निजामुद्दीन अहमद थे ।उनके पिता का नाम ख्वाजा मोहम्मद मुकीम हरबी था ।जो बाबर का दीवार ए ब्युता ब्युता था । हुमायूँ और अकबर के जमाने में भी उसने अजीब खिदमत अंजाम दी ।निजामुद्दीन एक पढ़ा-लिखा और मिलनसार आदमी था ।हर तबके और नजरिए की विद्वानों से उसका ताल्लुक था,बहुत से हमलों में वह अकबर के साथ रहा उसने गुजरात में बख्शी के पद पर काम किया मालवा और अजमेर में भी ऊंचे पदों पर नियुक्त रहा ऐसे में उसे हालात की व्यक्तिगत जानकारी हासिल करने में काफी मदद मिली तारीख ए अल्फ़ी लिखने वाले बोर्ड का सदस्य भी रहा था। वह एक मशहूर इतिहासकार और समझदार अधिकारी था 1594 में उसकी मृत्यु हुई ।तबकात ई अकबरी हिंदुस्तान की साधारण तारीख है यह 9 हिस्सों में विभाजित है, निजामुद्दीन ने अकबरनामा और आईने अकबरी से पूरा फायदा उठाया है, इसके अलावा उसने 28 दूसरे ग्रंथों का भी हवाला दिया है लेकिन उनमें से बहुत से अब उपलब्ध नहीं है बाबर के हालात ज्यादातर बाबरनामा से लिए गए हैं उसने अपने पिता की जानकारी से पूरा फायदा उठाया है हिमायू और अकबर के हालात काफी हद तक तारीख अलसी से लिए गए हैं अबुल फजल की चापलूसी और बदायूं नी की घृणा और कट्टरता के बीच निजामुद्दीन ने अपने लिए एक नया रास्ता बनाया है वह अकबर के काल का एक समझदार और इंसाफ पसंद इतिहासकार है।