जी- 7 शिखर सम्मेलन के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी

➡ जी-7 विश्व की 7 सर्वाधिक औद्योगिक एवं विकसित महाशक्तियों का संगठन है इस संगठन के सदस्य देश संयुक्त राज्य अमेरिका ,कनाडा ,यूनाइटेड किंग्डम ,फ्रांस इटली, जर्मनी एवं जापान हैं ।

➡ 1970  के दशक की वैश्विक आर्थिक मंदी व बढ़ते तेल संकट की पृष्ठभूमि में फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति वेलेरी  के आवाहन पर वर्ष 1975 में इस समूह का गठन हुआ।

➡ समूह के संस्थापक सदस्य तत्कालीन विश्व की सर्वाधिक औद्योगिक एवं लोकतांत्रिक देश- फ्रांस ,अमेरिका ,ब्रिटेन, इटली, जर्मनी एवं जापान थे।

➡ पेरिस के निकट रंबोइलेट में वर्ष 1975 में समूह की प्रथम बैठक का आयोजन हुआ।

➡ वर्ष 1976 में कनाडा के इस समूह में सम्मिलित होने के बाद समूह को जी-7 नाम दिया गया।

➡ गौरतलब है कि यूरोपीय संघ वर्ष 1977 से ही समूह का सहभागी सदस्य है ,परंतु उसे प्रथक सदस्य नहीं माना जाता है।

➡ जी-7 एक अनौपचारिक संगठन है ,जिसका ना तो कोई मुख्यालय है ,और ना ही सचिवालय इसका कोई चार्टर भी नहीं है।

➡ समूह के सदस्य देश विश्व के ज्वलंत मुद्दों पर वार्ता करने व उसका समाधान निकालने के लिए वार्षिक शिखर सम्मेलन का आयोजन करते हैं।

➡हाल ही में 8- 9 जून 2018 के मध्य आयोजित 44 वें जी-7 शिखर सम्मेलन में मेजबानी व  अध्यक्षता कनाडा द्वारा की गई।

➡यह छठा अवसर है जब कनाडा ने इस सम्मेलन की मेजबानी की।

वार्ता में शामिल मुद्दे

➡जी-7 की परंपरा के अनुसार मेजबान देश सम्मेलन की अध्यक्षता करने के साथ ही वार्ता में शामिल मुद्दों का भी निर्धारण करता है

➡कनाडा द्वारा 44 में शिखर सम्मेलन में वार्ता हेतु शामिल पांच मुख्य मुद्दे निम्न है-
1-सभी के विकास हेतु निवेश में वृद्धि करना 
2-भविष्य में रोजगार की संभावनाएं पैदा करना
3-महिला सशक्तिकरण एवं प्रगतिशील लैंगिक बराबरी सुनिश्चित करना।
4-जलवायु परिवर्तन ,महासागर एवं स्वच्छ ऊर्जा
5-शांतिपूर्ण एवं सुरक्षित विश्व का निर्माण

जी-6+1 की चर्चा

➡फ्रांस की सरकार व राजनीतिक समीक्षकों ने 44 में शिखर सम्मेलन को जी 6+1 सम्मेलन करार दिया । जी-6+1 से अभिप्राय अमेरिका का अन्य सदस्य देशों के साथ विभिन्न मुद्दों पर टकराव से है।

➡व्यापारिक संबंधों को लेकर अमेरिका फ्रांस और अमेरिका कनाडा के मध्य गतिरोध की स्थिति है।

➡इसके अतिरिक्त ईरान के साथ संयुक्त समग्र कार्ययोजना के समझौते से हटना, पेरिस जलवायु समझौते से बाहर आना और सीमा शुल्क में वृद्धि से अमेरिका की अन्य सदस्य देशों के साथ टकराव की स्थिति है।

अन्य महत्वपूर्ण तथ्य

➡जी-7 के 44वें शिखर सम्मेलन में अमेरिका द्वारा स्टील व एलुमिनियम पर आयात ड्यूटी में भारी वृद्धि करने के कारण फ्रांस और जर्मनी ने अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया।

➡44 में शिखर सम्मेलन के समापन के अवसर पर सदस्य देशों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण बनाए रखने पर प्रतिबद्धता जाहिर की।

➡गौरतलब है कि रूस के जी-7 समूह में शामिल होने से वर्ष 1997 में समूह का नाम जी-8 पड़ गया, परंतु वर्ष 2014 में सदस्य देशों द्वारा रूस को अनिश्चितकाल के लिए निलंबित करने के कारण समूह का नाम पुना जी-7 हो गया।

➡जी-7 के राष्ट्रों का 45 वां शिखर सम्मेलन वर्ष 2019 में फ्रांस में प्रस्तावित है।


 

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