भविष्य का इंधन हाइड्रोजन गैस को ही माना जा रहा है क्योंकि हाइड्रोजन ईंधन पर्यावरण के लिए सर्वाधिक अनुकूल है। हाइड्रोजन का उपयोग विद्युत उत्पादन और परिवहन के लिए भी किया जा सकता है ।
यह सबसे सरल रासायनिक तत्व है (1 प्रोटॉन एवं 1 इलेक्ट्रॉन) यह धरातल पर सबसे ज्यादा पाए जाने वाले तत्वों में से तीसरे स्थान पर आता है।
वातावरण में हाइड्रोजन प्राकृतिक रूप से नहीं पाया जाता हाइड्रोजन ईंधन को या तो जीवाश्म ईंधन यथा गैसोलीन (मेथेनॉल, प्रोपेन, ब्यूटेन) एवं प्राकृतिक गैस से प्राप्त किया जाता है या इसे इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया द्वारा जल के ऑक्सीजन एवं हाइड्रोजन में विघटन के द्वारा प्राप्त करते हैं।
परंतु इसे प्राप्त करने की दोनों प्रक्रियाओं में ऊर्जा की आवश्यकता है। अगर हाइड्रोजन को जीवाश्म ईंधन द्वारा प्राप्त करते हैं तो यह 'अनवीकरणीय उर्जा' कहलाती है एवं अगर इसे जल द्वारा प्राप्त करने में आवश्यक ऊर्जा को पवन या सौर द्वारा प्राप्त करते हैं तो यह 'नवीकरणीय ऊर्जा' कही जाती है अगर हाइड्रोजन का उत्पादन जल द्वारा होता है तो सह-उत्पाद के रूप में सिर्फ शुद्ध जल प्राप्त होता है परंतु जीवाश्म ईंधन उसे प्राप्त करने में कार्बन डाइऑक्साइड भी सह-उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है ।
वास्तव में हाइड्रोजन, ऊर्जा का स्रोत ना होकर एक माध्यम है जो ऊर्जा का परिवहन करता है एवं उसे संग्रहित करता है जबकि सौर, पवन, प्राकृतिक गैस एवं तेल ऊर्जा के स्रोत हैं।
अगर हाइड्रोजन को ऑक्सीजन की उपस्थिति में जलाया जाता है तो जल का निर्माण होता है। हाइड्रोजन का उत्पादन गैसोलीन की अपेक्षा कहीं महंगा पड़ता है इसलिए कभी-कभी हाइड्रोजन का उर्जा उदासीन के करीब माना जाता है अर्थात इसके उत्पादन में जितनी ऊर्जा खर्च होती है उतनी ही उर्जा वह अन्त में उत्पादित करता है हाइड्रोजन के दहन से इंधन बैटरी चालित वाहन में ऊर्जा प्राप्त होती है वर्तमान समय में ज्यादातर हाइड्रोजन का उत्पादन प्राकृतिक गैस से होता है।