इसका निर्माण शाहजहां ने अपनी पत्नी आरजूमंद बानो बेगम उर्फ मुमताज महल की याद में करवाया था।
या 17 वर्षों में बनकर तैयार हुआ इसकी योजना स्वयं शाहजहां ने बनाई थी।
उसी योजना के अनुसार कुशल कारीगरों ने इसे ताजमहल का रूप दिया।
फादर मेमोरी के अनुसार ताजमहल की योजना इटली के वेनिस का निवासी जनेरियो और विनियोग कलाकार ने बनाई थी।
स्मिथ के द्वारा भी इसे विदेशी कलाकृति माना जाता है इसके मुख्य कलाकार उस्ताद हिंसा थे जबकि शाहजहां ने भी इसका देखरेख किया ताजमहल की स्थापत्य कला शैली के संबंध में पारसी ब्राउन का विचार है कि इसका निर्माण दिल्ली के निर्मित कुमायूं के मकबरे के योजना अनुसार किया गया था।
ताजमहल के दोनों बगल में स्थित हैं जिनका निर्माण लाल पत्थरों से हुआ है।
ताज महल में दो शादियां हैं अली मुमताज की है दूसरी शाहजहां की है।
ताजमहल के निर्माण में प्रतिदिन 20000 लोग कार्य करते थे ।
इसके निर्माण में मकराना के संगमरमर का प्रयोग किया गया है।
उसके अनुसार कहा जाता है कि इसमें कार्य कर रहे 20000 लोगों के हाथों को कटवा दिया गया था।
इस प्रकार की खूबसूरत इमारत कभी ना बन पाए परंतु इसकी पुष्टि ना होने पर इसको नकार दिया गया ।
इसमें कुल 3 करोड़ रुपए हुआ था आरसी ब्राउन ताजमहल की प्रशंसा करते हुए लिखते हैं कि कि प्रत्येक घड़ी तथा प्रत्येक आकाशीय ताज के परिवर्तन का अलग-अलग रंग है सांवला रंग दोपहर में चकाचौंध कर देने वाली सफेदी रात्रि में चांद से इन सभी प्रकार से यह इमारत बहुत ही सुंदर लगती है और कहा जाता है कि शाहजहां ने इसे अपनी बेगम के लिए बनवाया था
तथा ठीक इसके सामने एक काले रंग का ताजमहल की इच्छा कर रहा था
पर अब तक जीवित रह सका क्योंकि इसके पुत्र ने इसे बंदी बनाकर उसी ताज महल के सामने यमुना नदी के उस पार इसे बंदी बना लिया और धीरे-धीरे करके वह मर गया ।