मुगल कालीन शिक्षा व्यवस्था

भारत में मुगलों की विजय के पश्चात शिक्षा की बहुत प्रगति हुई बाबर स्वयं उच्च कोटि का विद्वान चित्रकार और कलाप्रेमी था सर्वप्रथम उसने दिल्ली में एक मदरसा की स्थापना किया था। जिसमें परंपरागत इस्लामी विषयों के अतिरिक्त गणित ज्योतिष मंगोल इत्यादि विषयों की व्यवस्था की गई थी हुमायूं भी उच्च कोटि का विद्वान था उसने शिक्षा की प्रगति के लिए प्रयास किया लेकिन समय अभाव के कारण लागू नहीं कर सका। अकबर कोई शिक्षित व्यक्ति नहीं था फिर भी वह शिक्षा प्रणाली की ओर विशेष ध्यान दिया अकबर के प्रारंभिक शासन काल तक संपूर्ण मध्यकालीन शिक्षा प्रणाली एक जैसी थी उसमें कोई परिवर्तन नहीं हुआ था अकबर संपूर्ण भारत को एकता के सूत्र में बांधना चाहता था हिंदू और मुस्लिमों को शिक्षा के प्रति एक दूसरे को वापस लाने का प्रयास किया। इसके लिए उसने शिक्षा संबंधी सुधार किए अकबर बेसिक शिक्षा प्रणाली में नवीन सुधारों द्वारा शिक्षा के स्तर को ऊपर उठाने का प्रयास किया। अकबर ने मदरसा के पाठ्यक्रम में सुधार किए तथा प्रत्येक बालक को अंक गणित ज्यामिति रेखागणित ज्योतिषी शरीर विज्ञान घरेलू विषय राज्य के नियम औषधी शास्त्र और इतिहास की पुस्तकों को पढ़ाना चाहिए इन सभी विषयों का ज्ञान से प्राप्त कर लेना चाहिए अकबर ने संस्कृत पढ़ाने वालों को एक यह आदेश दिया कि संस्कृत पढ़ने वाले छात्रों को व्याकरण न्याय वेदांता पतंजलि का अध्ययन करना चाहिए वर्तमान समय में जिन वस्तुओं की आवश्यकता है उसकी अपेक्षा किसी को ना करने दी जाए। अकबर के सुधारों का काफी बड़ा अकबर के सुधारों के कारण बड़ी मात्रा में हिंदू फारसी भाषा का अध्ययन करने लगे मकतब और मदरसा में भी किसी प्रकार का भेदभाव नहीं था अकबर के दरबार में प्रसिद्ध विद्वान के नाम मिलते हैं जो आईने अकबरी में मिलते हैं।

माधव श्री भट्ट विश्वनाथ रामकिशन बलभद्र मिश्र वासुदेव मिश्रा वामन भट्ट महादेव सोमनाथ नारायण शिव जी इन्होंने फारसी भाषा में औषधी शास्त्र पुस्तक भी लिखा अकबर की धारा में दिल्ली में एक मदरसा की स्थापना किया जिसे खैरुल मनाजिल के नाम से जाना जाता है अकबर ने व्यवसायिक शिक्षा को महत्व दिया था विभिन्न कारखानों में जहां वस्तुओं का निर्माण नहीं होता था। वहां पर व्यवसायिक प्रशिक्षण की व्यवस्था किया अधिकारी जहांगीर और शाहजहां ने भी शिक्षा पर बल दिया अकबर के उत्तराधिकारी दिल्ली की जामा मस्जिद के निकट एक मदरसा की स्थापना करवाया था। शाहजहां की पुत्री जहांआरा बेगम स्वयं उच्च कोटि के विद्वान थी और उसने आगरा ले जाया गया मदरसा का निर्माण करवाया था औरंगजेब था इसने शिक्षकों विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति भी नियुक्त किया और उन्हें छात्रवृत्ति प्रदान करवाया।

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