अकबर के शासनकाल का अनुवाद विभाग

अकबर ने स्कूल की अरबी भाषा संस्कृत पुस्तकों का फारसी में अनुवाद करवाया बाबर की आत्मकथा तुजुक ए बाबरी का फारसी भाषा में अनुवाद बाबरनामा में किया इसका अनुवाद अबुल फजल रहीम खाने खाना द्वारा किया गया था बाबर द्वारा फैजी ने गणित पर लिखित पुस्तक लीलावती का फारसी भाषा में अनुवाद किया लीलावती भास्कराचार्य द्वारा लिखी गई।

पुस्तक थी मौलाना अब्दुल कादिर बंदा यूनी ने महाभारत का फारसी भाषा में अनुवाद किया और उसे नामा नाम दिया अबुल फजल ने संस्कृत पुस्तक पंचतंत्र का फारसी भाषा में अनुवाद किया और उसे अनवर ए ही किया इसी समय का वीर बंदा यूनी तथा उसके साथियों ने रामायण का फारसी भाषा में अनुवाद किया ताजुल माली के द्वारा गीता उपदेश का फारसी भाषा में उपयोग किया गया था और उसका नाम मूंगफली उपयोग रखा गया अकबर के उत्तराधिकारी जहांगीर के काल में फारसी साहित्य का विकास होता रहा। जहांगीर भी उच्च कोटि का विद्वान एवं समालोचक था जहांगीर ने अपनी आत्मकथा तुजुक ए जहांगीरी फारसी भाषा में लिखा इसने 17 वर्षों का अपना इतिहास लिखा लेकिन बीमार हो जाने के कारण 17 वर्ष से लेकर 19 वर्ष तक का इतिहास मोतियाबिंद के द्वारा लिखा गया ।शाहजहां ने अपने शासनकाल के अनेक विद्वानों कवियों लेखकों को संरक्षण प्रदान किया था। शाहजहां ने अपना राज कवि अबू तालिब का लिंग को नियुक्त किया था जिसने साकीनाका नामक पुस्तक की रचना किया शाहजहां के दरबार में विश्व भारती का कवि दाई गिलानी था। शाहजहां के दरबार में चंद्रभान ब्राह्मण निवासी करता था उठाया पहला हिंदू कविता जो अबुल फजल किस शैली में लिखने का कार्य करता था चार चमन नामक महत्वपूर्ण पुस्तक चंद्रभान ब्राह्मण के द्वारा लिखी गई थी शाहजहां के दरबार में निवास करने वाला में शाहजहां के प्रशंसकों में बादशाहनामा पुस्तक लिखी I

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