विद्रोह की जमीन पर एक गांधीवादी

भारत के तीन ही राज्य हैं जहां मेरा आज तक जाना नहीं हुआ नागालैंड इन में से एक है अगली फरवरी में एक सामाजिक कार्यकर्ता नेटवर्क कर के निमंत्रण पर वहां जाने का कार्यक्रम बना था ।जिसके साथ अत्याचार का बिरहा लेकिन मुलाकात कभी नहीं हुई 1932 में पश्चिमी भारत में जन्मे नेटवर्क भाई प्रख्यात गांधीवादी और देशभक्त काका काका साहब कालेलकर के संपर्क में आए और युवावस्था में ही अपना जीवन समाज सेवी को समर्पित कर दिया 1955 में नागालैंड गए और वहां के मोकोकचुंग कस्बे से लगभग 30 मील दूर सूची मलंग ग्राम में एक आश्रम की स्थापना की नेटवर्क करके नागालैंड जाने के अगले साल ही वहां अंग्रेजों के नेतृत्व में विद्रोह भड़क उठा जिसके दमन के लिए सेना भेजी गई नटवर भाई ने एक महिला ने तीनों से विवाह किया और उसके साथ 40 वर्षों का युग में उद्योगों की स्थापना के साथ इन लोगों के बीच वेबसाइट पर किया ही एक भी शुरू किया और तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी आश्रम को देखने गए थे यहां आए और योजना आयोग के तत्कालीन सिंह और उनके साथियों के साथ एक दिन विकास कार्यक्रम की सफलता की दिशा में अद्भुत काम कर रहा है और आत्मा विकास को मानवीय देते हुए उत्पादकता में शतक सुधार अत्यंत चुनौतीपूर्ण काम है ।यहां मशीन और मानव श्रम के बीच अद्भुत संतुलन देखने को मिला मैंने पहली बार नेटवर्क ठक्कर के बारे में 80 के दशक में सुना जब ब्रिटेन में जन्मे भारतीय मानव विज्ञानी वेरियर एल्विन की जीवनी पर काम कर रहा था गांधी से प्रभावित एल्विन का खासा वक्त साबरमती आश्रम में बीता हालांकि बाद में मध्य भारत के आदिवासियों के बीच काम करते हुए भोजन व शराब पर गांधी के शुद्धता वादी नजरिए ने उन्हें इस मामले में गांधी से थोड़ा दूर कर दिया एल्विन के दस्तावेजों में मुझे 1959 में लिखा। एक पत्र मिला जिसमें बार नागालैंड के इस गांधीवादी आश्रम की यात्रा के दौरान पूर्व के स्वाद और राइस बियर की रस लेकर चर्चा करते हैं अफसोस है कि 30 अक्टूबर में निधन हो गया और मैं उनसे मिलने से वंचित रह गया। हालांकि नागालैंड की यात्रा की भूमिका उन्होंने बनाई थी वह रूपा चिनाई की नई किताब अंडरस्टैंडिंग इंडिया-वेस्ट रिपोर्ट को पढ़ते हुए फिर से ताजा हो गई है या महसूस करती है कि विद्रोहियों के बीच संघर्ष की कीमत चुकानी पड़ती है अद्भुत हुआ और लोगों ने कैसे मानसिक यंत्रणाएं झेली।
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