ट्रांस हिमालय क्षेत्र -:
ट्रांस हिमालय मूलतः यूरेशिया प्लेट का एक खंड है। इसे 'तिब्बती हिमालया' या 'टेथीस हिमालय' की भी संज्ञा प्रदान की गई है। समूची श्रेणी पर वनस्पति का अभाव पाया जाता है। इसके अंतर्गत काराकोरम, कैलाश, जास्कर एवं लद्दाख आदि पर्वत श्रेणी आती हैं जिनका निर्माण हिमालय से भी पहले हो चुका था। यह मुख्यतः पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में मिलते हैं। भारत की सबसे ऊंची चोटी K2 या गॉडविन ऑस्टिन (8611 मीटर) है जो काराकोरम श्रेणी की सर्वोच्च श्रेणी है। सियाचिन (७२किलोमीटर) बाल्टोरा (58 किलोमीटर) बैफो (६० किलोमीटर) तथा हिस्पर (61 किलोमीटर) ये चारों काराकोरम श्रेणी के सबसे बड़े हिमखंड (ग्लेशियर) हैं। विश्व की सबसे बड़ी ढाल वाली चोटी राकापोशी (लद्दाख श्रृंखला का सर्वोच्च शिखर ) यहीं स्थित है। पश्चिम में यह श्रेणी पामीर की गांठ से मिल जाती है, जबकि दक्षिणपूर्व की ओर यह कैलाश श्रेणी के रूप में विस्तृत है। काराकोरम के दक्षिण में लद्दाख श्रेणी सिंधु नदी तथा इसकी सहायक श्योक के मध्य जल विभाजन का कार्य करती है।
ट्रांस हिमालय अवसादी चट्टानों का बना है । यहां पर टर्शियरी से लेकर कैम्ब्रियन युग तक की चट्टानें पाई जाती हैं। यह श्रेणी सतलुज, सिंधु वह ब्रह्मपुत्र(सांगपो) जैसी पूर्ववर्ती नदियों को जन्म देती है। ट्रांस हिमालय, वृहद् हिमालय से शचर जोन या हिन्ज लाइन के द्वारा अलग होती है।