भारतीय संविधान की समीक्षा की आवश्यकता को समय-समय पर प्रकट किया गया था। 12 वीं लोकसभा के निर्वाचन के अवसर पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन द्वारा जारी संविधान के व्यापक पुननिरीक्षण के संबंध में सुझाव देने के लिए उच्चधिकार प्राप्त आयोग की नियुक्ति की घोषणा की थी ।13 फरवरी 2000 को उच्चतम न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एम.एन वैकटचलैया की अध्यक्षता में 11 सदस्यीय संविधान समीक्षा आयोग का गठन किया गया। आयोग को भारत के संविधान में मूल ढांचे में कोई परिवर्तन किए बिना आवश्यक बदलाव के सुझाव सुझाने थे। आयोग ने 31 मार्च 2002 कों अपना 1976 पृष्ठ प्रतिवेदन सौंपा । संविधान समीक्षा आयोग ने विभिन्न मुद्दों पर प्रमुख सिफारिश प्रधान की जैसे - संविधान की धारा 356 का कम से कम उपयोग, लोकसभा तथा विधानसभा में बहुमत के अभाव में जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री का निर्वाचन, अविश्वास प्रस्ताव के रचनात्मक वोट का सिद्धांत, न्यायिक सुधार हेतु न्यायिक आयोग की स्थापना,
संविधान स
मीक्षा आयोग द्वारा दशकों में दे दी गई अधिकारों को लागू करने का कोई निर्णय नहीं लिया गए हैं