गांधी ,नेहरू और बोस की विचारधारा का तुलनात्मक विश्लेषण-

महात्मा गांधी - गांधी जी कांग्रेस के  रूढ़िवादी समूह का नेतृत्व महात्मा गांधी के हाथों में था । बोस , गांधीजी के विचारों तथा समझौता वादी नीतियों के प्रखर आलोचक थे । सुभाष चंद्र बोस का मानना था कि द्वितीय विश्व युद्ध यह अवसर है , जिसका प्रयोग स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए किया जा सकता है । दूसरी और महात्मा गांधी एवं जवाहरलाल नेहरू को ब्रिटेन के संकटा पन्न स्थिति का लाभ उठाने का विचार पसंद नहीं आया। सुभाष चंद्र बोस औद्योगिकीकरण के आधार पर देश का आर्थिक विकास करना चाहते थे , वहीं महात्मा गांधी औद्योगिकीकरण के विरोधी थे, इसलिए बॉस और गांधीजी के मध्य मतभेद और भी गए हुए।

पंडित जवाहरलाल नेहरू-  जवाहरलाल नेहरू ने ना तो गांधीवाद को पूरी तरह स्वीकार किया और ना ही मार्क्सवाद पर आंख मूंदकर विश्वास किया । नेहरू वर्ग संघर्ष पर तो विश्वास करते थे । किन्तु हिंसक क्रांति के स्थान पर शांतिपूर्ण संसदीय संस्थाओं के माध्यम से परिवर्तन के पछधर थे । वे गांधी के अहिंसक विचार से प्रभावित थे , नेहरू जी एक और समाजवादी विचारधारा से प्रेरित आर्थिक न्याय , आर्थिक समानता जैसे प्रगतिशील विचारों के पक्षधर थे , तो दूसरी ओर उदारवाद की वैयक्तिक स्वतंत्रता की अवधारणा का भी सम्मान करते थे । नेहरू जी के समाजवाद में वितरण की जगह उत्पादन पर ज्यादा बल दिया गया था।  उनका कहना था कि गरीबी का कोई समाजवाद नहीं होता इसलिए उत्पादन के ढांचे को प्रभावित किए बिना समाजवाद के लक्ष्य को प्राप्त नहीं किया जा सकता है ।

सुभाष चंद्र बोस - सुभाष चंद्र बोस का समाजवाद प्राचीन भारतीय परंपरा से प्रभावित थे । वेद , शास्त्र , उपनिषद आदि  से अत्यधिक प्रभावित थे । सुभाष चंद्र बोस के समाजवाद में मार्क्सवाद तथा फांसीवाद का मिश्रण देखने को मिलता है  । इस मिश्रण को उन्होंने साम्यवाद नाम दिया।  स्वतंत्रता को प्राप्त करने के लिए किसी भी साधन का उपयोग करने के पक्षधर थे ।

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