भारत में महासागरीय जल परिवहन (भाग-1)

भारत में व्यापक स्तर पर महासागर जल परिवहन होता है अर्थव्यवस्था के संदर्भ में उसे बहुत महत्वपूर्ण माना गया है भारत का विदेशी व्यापार वृहद स्तर पर महासागरीय जल परिवहन के माध्यम से होता है भार के अनुसार जहां इस का प्रतिशत  95 के लगभग है वही मूल्य के अनुसार 70% है भारत में कुल बंदरगाह 198 है जिनमें 13 बड़े और 185 छोटे बंदरगाह  है यहां देश के 13 बड़े बंदरगाहों के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी जा रही है 

1-मुंबई बंदरगाह-सालसट द्वीप के प्राकृतिक कटान में स्थित या बंदरगाह मुक्त व्यापार क्षेत्र के लिए भी जाना जाता है इस में पानी की गहराई 11 मीटर है चक्रवात एवं तूफान से सुरक्षित यह बंदरगाह यात्री परिवहन पेट्रोलियम खदान चमड़ा व वस्त्रों खदान चमड़ा व वस्त्रों के परिवहन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है या भारत का सबसे बड़ा बंदरगाह है 

2-कांडला बंदरगाह- यह कच्छ की खाड़ी (गुजरात) में अवस्थित है मुख्य बाजार क्षेत्र के रूप में जाना जाने वाला यह बंदरगाह प्राकृतिक व सुरक्षित है। हालांकि यह भूकंप प्रभावित जोन V में अवस्थित है। यह बंदरगाह आयात शुल्क व चुंगी से मुक्त है पेट्रोलियम उत्पादों के आयात की दृष्टि से इस का विशेष महत्व  है कांडला भारत का प्रमुख आयातक बंदरगाह है तथा यह आयात नौभार एवं निर्यात नौभार का उच्चतम टन भार संभालता है। कांडला में एल. एन.जी. टर्मिनल नहीं है यहां से तेल पाइप लाइनों द्वारा तेल देश के विभिन्न हिस्सों में पहुंचाया जाता है 

3-न्यू मंगलौर बंदरगाह- मंगलौर से 9 किलोमीटर  उत्तर में स्थित या बंदरगाह रेल लाइन व राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 17 से जुड़ा हुआ है। यहां से लौह अयस्को का निर्यात होता है मुख्य रूप से मछलियों,.काजू, कहवा व उर्वरक आदि का यहां से निर्यात किया जाता है 

4-न्हावा शेवा बंदरगाह- (जवाहर लाल नेहरू बंदरगाह) देश के इस आधुनिक बंदरगाह का विकास इस उद्देश्य किया गया कि मुंबई बंदरगाह के बाहर को कम किया जा सके य नवी मुंबई पनवेल के पास अवस्थित है ।


5-मर्मुगावो बंदरगाह-यह प्राकृतिक बंदरगाह है जो कि गोवा के जुआरी नदी के बाएं पैर पर अवस्थित है यहां से मुख्य रूप से लौह अयस्क निर्यात किए जाते हैं इसके अलावा काजू, मछलियां, चावल व मसालों आदि का भी यहां से निर्यात किया जाता है ।

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