भारत में महासागरीय जल परिवहन (भाग-2)

6-कोच्चि बंदरगाह- यह प्राकृतिक बंदरगाह विलिंगटन द्वीप, मालाबार तट,(केरल तट) पर  स्थित है। उर्वरक, खनिज तेल,तेल आदि के आयात तथा काजू, चाय, मछली, रबर, नारियल आदि के निर्यात के लिए यह जाना जाता है। यह बंदरगाह पूरे वर्ष चालू रहता है

7-चेन्नई बंदरगाह - वैसे तो यह बंदरगाह अप्राकृतिक है किंतु इसकी गणना भारत के मुख्य बंदरगाह के रूप में होती है मुंबई के बाद व्यापारिक दृष्टि से यह हमारा सबसे महत्वपूर्ण बंदरगाह है पूर्वी तट के खुले समुद्र में स्थित होने के कारण पोतों के लिए समुद्री लहरों से खतरा बना रहता है। हालांकि बचाव के लिए दीवार का घेरा बनाया गया है।

8-तूतीकोरिन बंदरगाह -यह खुला बंदरगाह मन्नार की खाड़ी (तमिलनाडु तट) में स्थित में है इसका पोताश्रय अपेक्षाकृत गहरा एवं कृतिम है। यह आयात व निर्यात दोनों के लिए जाना जाता है मुख्य रूप से कपास, चाय, प्याज, सूती वस्त्रों चमड़ो व कहवा आदि का निर्यात किया जाता है वहीं नमक, उर्वरक, खनिज तेल व कोयला आदि का आयात किया जाता है।

9-कोलकाता बंदरगाह-हुगली नदी (पश्चिम बंगाल) के बाएं तट पर स्थित यह बंदरगाह वस्तुतः एक नदी पत्तन है क्योंकि, हुगली में गाद जमने की समस्या के कारण बड़े जलपोत कोलकाता तक नहीं पहुंच पाते यहां से सामानों का आयात व निर्यात दोनों होते हैं। जहां उर्वरक, खनिज तेल, रसायन, खाद्य, तेल व कपास आदि का आयात किया जाता है, वहीं अभ्रक, चाय, कोयला, कागज, चमड़ा व चीनी आदि का निर्यात किया जाता है।

10-पारादीप बंदरगाह -यह एक कृत्रिम बंदरगाह है जो कि उड़ीसा के तट पर स्थित है यहां मशीनों द्वारा लौह अयस्क उतारे व लादे जाते हैं। मुख्य रूप से लौह अयस्कों  तथा अभ्रक, बॉक्साइट मैग्नीज, कोयला व ग्रफाइट आदि के निर्यात के लिए यह जाना जाता है। मशीनों, यंत्रों, उर्वरकों के आयात  का भी यह केंद्र है इस इस बंदरगाह का निर्माण कोलकाता विशाखापट्टनम बंदरगाहों के भार को कम करने के लिए करवाया गया था।

11-हल्दिया बंदरगाह -यह हुगली नदी पश्चिम बंगाल के मुहाने पर अवस्थित है जो बहुत बड़े जहाज कोलकाता नहीं पहुंच पाते वे यहां रुकते हैं। यहां से मुख्य रूप से पेट्रोलियम उत्पादों का परिवहन होता है। हल्दिया बंदरगाह बाह्म पत्तन का विशिष्ट  उदाहरण है। ज्ञात हो कि बाह्म पत्तन, मुख्य पत्तन का सहायक पत्तन होता है तथा गहरे जलीय भाग में स्थित होता है।

12-विशाखापट्टनम बंदरगाह -यह एक प्राकृतिक बंदरगाह है जो कि काफी गहरा है। यह आंध्र प्रदेश में अवस्थित है । यह तूफान आदि से प्राकृतिक रूप से सुरक्षित है क्योंकि डॉल्फिन नोज नामक पहाड़ी इसके लिए सुरक्षा कवच का काम करती है यह बंदरगाह मुख्य रूप से निर्यात के लिए ही जाना जाता है। यहां से चमड़े के समान, मैग्नीज, कोयला व खाद्यान आदि का निर्यात होता है।

13-एन्नौर बंदरगाह- इसकी अवस्थिति चेन्नई के उत्तर में तमिलनाडु तट पर है यह चेन्नई बंदरगाह के भार को कम करता है यह बंदरगाह मुख्य रूप से कोयले के व्यापार के लिए जाना जाता है।

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