इसरो का शुक्र मिशन

इसरो द्वारा हाल ही में वर्ष 2023 के मध्य में प्रस्तावित अपने शुक्र मिशन के लिए वैज्ञानिक पेलोड हेतु अंतर्राष्ट्रीय प्रस्ताव को आमंत्रित किया गया है। इसे 2022 में प्रस्तावित इसरो के पहले मानव युक्त अंतरिक्ष उड़ान मिशन के 1 वर्ष के भीतर प्रक्षेपित किया जाएगा। इसरो का मिशन वीनस इसका दूसरा अंतरग्रहीय मिशन होगा।

      भारत वीनस मिशन के लिए सेटेलाइट 12                     वैज्ञानिक पैरोट भेजेगा जिसमें थर्मल कैमरा मास           स्पेक्ट्रोमीटर और क्लाउड मॉनिटर शामिल है के           मुताबिक इस अंतरिक्ष यान में 100 किलोग्राम             की पेलोड क्षमता होने की संभावना है।

इसरो का शुक्र मिशन शुक्र के चारों ओर500x60,000 किलोमीटर की कक्षा में स्थापित होगा। इस मिशन में Apoapsis मतलब वह बिंदु जब उपग्रह शुक्र से दूरस्त्थ होगा, धीरे-धीरे कई महीनों में कम किया जाएगा। आकाश, द्रव्यमान, घनत्व, संरचना और गुरुत्वाकर्षण में समानता की वजह से शुक्र को पृथ्वी की जुड़वा बहन माना जाता है। यह मिशन शुक्र ग्रह की सतह, वायुमंडलीय रसायन शास्त्र  तथा सौर विकिरण के अध्ययन पर ध्यान केंद्रित करेगा।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने एक बयान में कहा है कि यह आमंत्रण विदेशी अंतरिक्ष संगठनों सूर्य प्रयोगशालाओं और शैक्षणिक विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिकों के पास शुक्र पर अध्ययन करने का एक सुनहरा मौका प्रदान कर रहा है।

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