कांग्रेस के गठन से पूर्व देश में एक अखिल भारतीय संस्था के गठन की भूमिका तैयार हो चुकी थी। 19वीं शताब्दी के छठे दशक से ही राष्ट्रवादी राजनीतिक कार्यकर्ता एक अखिल भारतीय संगठन के निर्माण में प्रयासरत थे। किंतु इस विचार को मुहूर्त एवं व्यवहारिक रूप देने का श्रेय एक सेवानिवृत्त अंग्रेज अधिकारी ए ओ ह्यूम को प्राप्त हुआ। इस अखिल भारतीय कांग्रेस का आयोजन किया गया। 1884 में ही उन्हीं के प्रयत्नों से एक संस्था इंडियन नेशनल यूनियन की स्थापना हुई ।इस यूनियन ने पुणे में 1885 में राष्ट्र के विभिन्न प्रतिनिधियों का सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया। और इस कार्य का उत्तरदायित्व भी ए ओ ह्यूम को सौंपा लेकिन पुणे मी हैजा फैल जाने के कारण सम्मेलन मुंबई में आयोजित किया गया। सम्मेलन में भारत के सभी प्रमुख शहरों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यही सर्वप्रथम अखिल भारतीय कांग्रेस का गठन किया गया। ए ओ ह्यूम के अतिरिक्त सुरेंद्रनाथ बनर्जी तथा आनंद मोहन बोस कांग्रेस के प्रमुख वास्तविक माने जाते हैं। कांग्रेस के प्रथम अधिवेशन की अध्यक्षता उमेश चंद्र बनर्जी ने की। तथा इसमें 72 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसके पश्चात प्रतिवर्ष भारत के विभिन्न शहरों में इसका वार्षिक अधिवेशन आयोजित किया जाता था।