➡भारत में प्रतिवर्ष बड़ी मात्रा में कार्बनिक अपशिष्ट उत्पन्न होता है । यहां प्रतिवर्ष लगभग 60 हजार टन अपशिष्ट पशुओं से तथा लगभग 600 मिलियन टन अपशिष्ट फसलों से उत्पन्न होता है । इनमें से अधिकांश का निष्पादन जलाकर अथवा उन्हें कहीं खाली पड़ी भूमि पर अथवा किसी जलाशय में फेंक दिया जाता है , अपशिष्टों के इस अवैज्ञानिक निष्पादन से अनेक स्वस्थ एवं पर्यावरण दुष्प्रभाव उत्पन्न होते हैं । डब्ल्यूएचओ के एक आकलन के अनुसार भारत में प्रतिवर्ष लगभग 5 लाख लोग स्वच्छ ईंधन के कारण काल का ग्रास बन जाते हैं। कार्बनिक अपशिष्टों का यदि उचित प्रयोग किया जाए तो यह संसाधनों के रूप में भी प्रयुक्त किए जा सकते हैं उनका ईंधन उर्वरक तथा अन्य गतिविधियों में उपयोग किया जा सकता है । अपशिष्ट की इन्हीं संभावनाओं के दोहन हेतु वित्त मंत्री द्वारा बजट भाषण 2018-19 में गोबर धन योजना की घोषणा की गई थी ।
⚫ गोबर धन योजना का शुभारंभ
➡30 अप्रैल 2018 को पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री सुश्री उमा भारती द्वारा हरियाणा के करनाल स्थित राष्ट्रीय डेयरी शोध संस्थान से गोबर धन योजना का शुभारंभ किया गया।
➡गोबर धन योजना स्वच्छ भारत मिशन के तहत क्रियान्वित की जाएगी ,इस योजना के तहत वर्ष 2018-19 में कुल 700 बायोगैस इकाइयां स्थापित की जाएंगी।
➡योजना के तहत प्रत्येक जिले में कम से कम एक बायोगैस इकाई लगाने का प्रस्ताव है
⚫गोबर धन योजना के प्रमुख तथ्य
➡गोबर धन योजना स्वच्छ भारत मिशन के ओडीएफ प्लस रणनीति का प्रमुख भाग है
➡इसके तहत प्रदान की जाने वाली वित्तीय सहायता केंद्र एवं राज्य के मध्य 60:40 के अनुपात में होगी।
➡इस पर तकनीकी सहायता देने हेतु पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समिति का गठन किया जाएगा।
⚫गोबर धन योजना से लाभ
➡योजना से गांव में स्वच्छता बढ़ेगी जिससे पर्यावरण प्रदूषण की समस्या का समाधान होगा तथा अनेक बीमारियां जैसे- मलेरिया ,हैजा आदि के प्रभाव में कमी भी आएगी।
➡रसोई तक स्वच्छ ईंधन की उपलब्धता से महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार के साथ-साथ महिलाओं का सशक्तिकरण भी होगा, क्योंकि अब वे ईंधन इकट्ठा करने के समय को उत्पादन गतिविधियों में लगा सकेंगी।
➡कृषि की दृष्टि से भी यह योजना काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे जहां एक और किसानों को महंगे रसायनिक खादों के विकल्प में सस्ती कार्बनिक खादें मिलेंगे वहीं दूसरी ओर कृषि की उत्पादकता तथा धारणीयता दोनों में सुधार होगा इसका समग्र प्रभाव किसानों एवं कृषि आश्रित अन्य वर्गों की आय में वृद्धि के रूप में दिखेगा।
➡गोबर धन योजना बड़ी मात्रा में रोजगार के अवसरों का सृजन करेगी जिससे लोगों की आय में वृद्धि भी होगी।