मांटेग्यू की 20 अगस्त, 1917 की घोषणा

अपने कार्यभार संभालने के 5 सप्ताह के भीतर ही मांटेग्यू महोदय जो नए भारतीय सचिव थे, नें 20 अगस्त 1917 को कॉमन सभा से अंग्रेजी सरकार के उद्देश्य पर एक महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा: "महामहिम सम्राट की सरकार की नीति, जिससे भारत सरकार भी पूर्णता सहमत है, यह है कि भारतीय शासन के प्रत्येक विभाग में भारतीयों का संपर्क उत्तरोत्तर बड़े तथा स्वशासी प्रशासनिक संस्थाओं का धीरे-धीरे विकास हो जिससे अधिकाधिक प्रगति करते हुए उत्तरदाई प्रणाली भारत में स्थापित हो और यह अंग्रेजी साम्राज्य के अभिन्न अंग के रूप में आगे बढ़े। उन्होंने यह निश्चय कर लिया है कि इस दिशा में एक महत्वपूर्ण चरण शीघ्र शीघ्र लिया जाए मैं इस विषय में यह बता दूं कि यह प्रगति क्रमबद्ध चरणों में ही संभव है। ब्रिटिश सरकार और भारत सरकार जिन पर भारत के लोगों की भलाई और अग्रसरण का उत्तरदायित्व समय तथा उन्नत की मात्रा को निश्चित करेंगे और वह उन लोगों के सहयोग पर निर्भर होगा जिनको अब सेवा के अवसर मिलेंगे अथवा जिससे जिस सीमा तक विश्वास को जो उनकी उत्तरदायित्व की चेतना पर किया जा सकता है, निभाएंगे।"ल मोंटफोर्ट रिपोर्ट के प्रवर्तको ने इस घोषणा को भारत के रंग-बिरंगे इतिहास में "सबसे महत्वपूर्ण घोषणा की संज्ञा दी है और इससे "एक युग का अंत हुआ और एक नवीन युग का प्रारंभ हुआ माना।" ऐसा माना उदारवाद के दर्शन में विश्वास की घोषणा थी। यह इस भावना मर निर्भरता की "स्वतंत्रा ही मनुष्य को स्वतंत्रता की उपयुक्त बनाती है।" इस घोषणा ने कुछ समय के लिए भारत में तनावपूर्ण वातावरण को शांत बना दिया पहली बार 'उत्तरदाई शासन' शब्दों का प्रयोग किया गया।

परंतु भारत में एक ऐसा वर्ग भी था जो इससे संतुष्ट नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि भारत के उद्देश्य की पूर्ति के लिए समय निश्चित नहीं किया गया है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि कैसे पता लगेगा सुधारों के नए चरण के लिए समय आ गया है निश्चय ही या भारतीय लोगों का तिरस्कार है कि अंग्रेज ही निर्णय करेंगे कि भारत को क्या और कब मिलना चाहिए।

भारत सचिव स्वयं नवंबर 1917 में भारत आए और उन्होंने लॉर्ड चेम्सफोर्ड कुछ प्रतिष्ठित अधिकारियों तथा भारत के सभी विचारों के नेताओं से बातचीत की एक समिति जिसमें सर विलियम ड्यूक, भूपेंद्र नाथ बसु और अंग्रेजी संसद के सदस्य चार्ल्स रोबर्ट, जिन्होंने संसद में प्रश्न पूछा था, जिसके उत्तर में अगस्त घोषणा की गई थी, सम्मिलित थे, गठित की गई जिसने वायसराय के साथ मिलकर मोंटेग्यू महोदय को सुधारो का मसविदा तैयार करने में सहायता दी। यह योजना जुलाई 1918 में प्रकाशित की गई और इस को आधार मानकर 1919 का भारत सरकार अधिनियम बनाया गया।

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