एक्वा कल्चर जलीय जन्तुओ तथा पौधों का कृत्रिम संवर्धन है। एक्वा कल्चर में बुनियादी तौर पर व्यवहारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण लवण जलीय तथा अलवण जलीय मछलियो , घोघा , क्रस्टेशियनो और जलीय पौधों की खाद्य प्रजातियों का संवर्धन किया जाता है। सामान्यता प्राकृतिक जल निकायों में अत्यधिक जैव विविधिता पाई जाती है। मनुष्यों के द्वारा बहुत कम प्रजातियों का ही संवर्धन किया जाता है।
भारत में अन्तस्थलीय जलीय क्षेत्र लगभग 1.6 मिलियन हेक्टेयर भू भाग में फैला हुआ है। यह बड़े नदी तंत्रो , जैसे - गंगा , यमुना , ब्रह्मपुत्र , नर्मदा आदि नदियों के रूप में हैं। इसके आलावा नहरों , तालाबो , झीलो तथा सिचाई चैनलों में भी मत्स्य संवर्द्धन किया जा सकता है। तिलपिया , ट्राउट , ग्रीन कॉर्प , कैट फिश आदि का संवर्द्धन किया जाता है।
तिलपिया को ' जल की मुर्गी ' भी कहा जाता है साथ ही इसमें कई रोगों और परजीवियों के लिए प्रति रोधक क्षमता होती है। एक्वा कल्चर की पारिस्थितिकी दक्षता उच्च होती है। कम जल में अधिक उत्पादन तथा मछलियो की उन्नत किस्म प्राप्त की जा सकती है।