राष्ट्रपति शासन

 भारतीय संविधान के अनुच्छेद 356 के अनुसार राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता पर राष्ट्रपति आपात स्थिति (राष्ट्रपति) की उद्-घोषणा कर सकता है। 

भारतीय संविधान के अनुच्छेद -365 के अनुसार संघ द्वारा दिए गए निर्देशों का किसी राज्य द्वारा अनुपालन ना करने की दशा में राष्ट्रपति यह मान सकता है मान में राष्ट्रपति यह मान सकता है कि उस राज्य का शासन संवैधानिक रूप से नहीं चलाया जा रहा है।

 ध्यातव्य है कि राज्य में राष्ट्रपति शासन प्रायः राज्य के राज्यपाल (गवर्नर) की सलाह पर लागू किया जाता है।

 राज्यों में राष्ट्रपति शासन उद्-घोषणा की तिथि 2 मार्च तक रहती तक रहती है परंतु यदि संसद के दोनों सदन इसे साधारण बहुमत से पारित कर दे तो यह 6 माह तक एवं इसी प्रक्रिया का पालन
 6-6 माह की वृद्धि से अधिकतम 3 वर्ष तक परावर्तन में रह सकता है। 

ध्यातव्य है कि आपातकाल के परिवर्तन में रहने के दौरान राष्ट्रपति शासन 1 वर्ष से अधिक एवं अधिकतम 3 वर्ष तक रह सकता है यदि निर्वाचन आयोग यह प्रमाणित कर दे कि चुनाव कराने की कठिनाई के कारण राष्ट्रपति शासन आवश्यक है। 


भारतीय संविधान के अनुच्छेद-356 के तहत घोसित आपातकाल (राष्ट्रपति शासन) का न्यायिक पुनर्विलोकन उच्चतम न्यायालय कर सकता है।

 ध्यातव्य है कि आपातकाल की उद्-घोषणा के प्रवर्तन में रहने के दौरान राज्य विधानसभा की अवधि बढ़ने का अधिकार संसद को प्राप्त है।

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