मिश्र की प्राचीन सभ्यता part 2

मिस्र का व्यापार नील नदी के माध्यम से होता था। मिश्र के शासक सूर्य देवता के प्रतिनिधि माने जाते थे।इन्हें फराहो को कहा जाता था। इनके कार्यों में सहायता के लिए “सरु” नामक एक परिषद होती थी। मिस्र के पिरामिडों में खूफु द्वारा गीजा में बनाया गया पिरामिड विश्व प्रसिद्ध है।

मिस्र में मूर्तिकला का भी पर्याप्त विकास हुआ गीजा के पिरामिड के सामने स्थित विशाल स्फिग्स (नर्सिंह मूर्ति) विश्व की विशालतम मूर्ति है।मिस्र की प्राचीन चित्राक्षर लिपि को हाइरोग्लाफिक कहा जाता है।

मिस्र के लोगों ने तारों व सूर्य के आधार पर अपना केंद्र बना दिया था तथा 360 दिन की गणना कर ली थी । मृत शवों को औषधियों का लेप लगाकर सुरक्षित रखने का विज्ञान मिश्र में प्रचलित था।

मिस्र की प्राचीन लिपि को पढ़ने वाला विद्वान फ्रांस का शाम्पिलियो था। हेरोडोटस ने मिस्र को नील नदी का वरदान कहा है। हेरोडोटस के अनुसार अनेक जातियों के सम्मिश्रण से मिस्र की सभ्यता का निर्माण हुआ।

काल विभाजन

  1. 3400 B.C. – 2475 B.C. – इस कॉल को मिस्र में पुरातन युग या पिरामिडों का युग भी कहा जाता है।
  2. 2475 BC -1788 BC-  इस कॉल को मिस्र में मध्य राज्य युग या सामंतवाद का युग भी कहा जाता है।
  3. 1788 BC -1580 BC-  इस काल में मिस्र में हिक्सास नामक विदेशी आक्रमणकारियों का आधिपत्य रहा।
  4. 1580 BC-1090 BC – इस काल को मिस्र में साम्राज्यवाद का युग कहा जाता है । हिक्सास को खदेड़ने के बाद मिस्र के 18वें राजवंश ने साम्राज्यवाद की नीति प्रारंभ कर दी।
  5. 1090 BC – 663 BC- इस काल में मिस्र में विदेशी आक्रमण प्रारंभ हो गए।
  6. 663 BC -525 BC- इस काल को मिस्र में नवीन साम्राज्यवाद भी कहा जाता है।
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