लार्ड रीडिंग (1921-26ई0)
1922ई0 के चैरी-चैरा काण्ड (उ0प्र0गोरखपुर) के बाद महात्मा गाँधी ने अपना असहयोग आन्दोलन वापस ले लिया।
1921ई0 में मोपला(मालावार के मुस्लिम किसान) विद्रोह हुआ।
इसी के काल में 1925 में चितरंजनदास एवं मोती लाल नेहरू ने इलाहाबाद में स्वराज पार्टी की स्थापना की।
लार्ड इरविन (1926-31)
इसी के समय में 1928ई0 को साइमन कमीशन बम्बई पहुँचा।
साइमन कमीशन का विरोध करते समय लाला लाजपत राय (शेरे पंजाब) पर ब्रिटिश पुलिस द्वारा किये गये लाठी चार्ज के चोट के कारण उनका निधन हो गया।
12 मार्च 1930ई0 को गाँधी जी के द्वारा सविनय अवज्ञा आन्दोलन प्रारम्भ किया गया।
24 दिन के लम्बी यात्रा के बाद 5 अप्रैल 1930 को दांडी (गुजरात प्रान्त के नवसारी जिले) में गाँधी जी ने सांकेतिक रूप से नमक कानून को तोड़ा।
13 सितम्बर 1929 जतिनदास की 63 दिन के भूख हड़ताल के कारण जेल में मृत्यु हो गयी।
भारतीय क्रान्तिकारियांे (भगत सिंह, बटुकेश्वर दत्त) द्वारा दिल्ली के केन्द्रीय एसेम्बली में बम फेका गया।
1929 केे कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में श्पूर्ण स्वराजश् का लक्ष्य निर्धारित किया गया। इस अधिवेशन की अध्यक्षता पंण्डित जवाहर लाल नेहरू नें की थी।
इस अधिवेशन मे पूर्ण स्वाराज की घोषणा के साथ-साथ कांग्रेसियों ने 26 जनवरी 1930 को स्वतन्त्रता दिवस मनाने की घोषणा की।
12 नवम्बर 1930 में लंदन में प्रथम गोलमेज सम्मेलन हुआ। इस सम्मेलन मे कांग्रेस ने भाग नही लिया।
5 मार्च 1931 को गाँधी इरविन समझौता हुआ और समझौते के बाद गाँधी जी ने सविनय अवज्ञा अन्दोलन को स्थगित कर दिया।
-शेष अगले भाग में