लार्ड वेलिंगटन (1931-36)
इसके समय में 1931ई0 को द्वितीय गोल मेज सम्मेलन लंदन के जेम्स पैलेस में हुआ।
इस सम्मेलन में गाँधी जी ने कांग्रेस का प्रतिनिधित्व किया। इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए पंण्डित मदन मोहन मालवीय एवं श्रीमती एनीबेसेण्ट अपनी खर्च पर लंदन गये थे।
व्र्रिटिश प्रधान मंत्री मैक्डोनाल्ड ने 16 अगस्त 1932 को साम्प्रदायिक पंचाट की घोषणा की। इस पंचाट द्वारा दलितों एवं हरिजनों को पृथक निर्वाचन का अधिकार प्रदान करने की घोषणा की गयी। जिसे बाद में महात्मा गाँधी एवं डा0 भीम राव अम्बेडकर के बीच हुये पूना समझौते के बाद वापस ले लिया गया।
इसी के समय में तृतीय गोल मेज सम्मेलन 1932 में हुआ। इस सम्मेलन का कांगे्रस ने बहिष्कार किया।
लंदन में हुये तीन गोल मेज सम्मेलनों में केवल द्वितीय गोल मेज सम्मेलन में कांग्रेस ने भाग लिया था।
लार्ड लिनलिथगों, लार्ड वेलिंगटन (1936-43)
1935 के अधिनियम द्वारा वायसराय को पुनः गर्वनर जनरल कहा जाने लगा।
1935 के अधिनियम के अन्तर्गत 1937 में हुये प्रथम आम चुनाव में कांग्रेस ने 11 मे से 7 प्रान्तों में अपनी सरकार बनायी।
बिना कांग्रेेस की अनुमति केे भारत को द्वितीय विश्वयुद्व में शामिल करने के प्रश्न पर कांगे्रस मन्त्रिमंडल ने 1939 में त्यागपत्र दे दिया।
22 दिसम्बर 1939 मे मुस्लिम लीग ने इसे (राज्यों में कांग्रंेस मंत्री मंडलो द्वारा त्याग पत्र दिया जाना) मुक्ति दिवस के रूप में मनाया।
1937 मंे पहली बार एक ग्राम फैजपुर (बंगाल) में कांग्रेस का अधिवेशन हुआ जिसकी अध्यक्षता पं0 जवाहर लाल नेहरू ने की थी।
इसी के समय में 19 जुलाई 1942 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की कार्यकारणी समिति द्वारा भारत छोड़ो प्रस्ताव पारित किया गया।
इसी के समय लीग के लाहौर अधिवेशन में पहली बार मुसलमानो के लिए पृथक देश पाकिस्तान की माँग की गयी।
1942 ई0 में क्रिप्स मिशन भारत आया।
1939 मे सुभाष चन्द्र बोस द्वारा फारवर्ड ब्लाक का गठन किया गया।
-शेष अगले भाग में