गुप्त-राजवंश: प्रारंभिक इतिहास

गुप्त राजवंश की स्थापना लगभग 275 ईसवी में महाराज  गुप्त द्वारा की गई थी। हमें यह निश्चित रूप से पता नहीं है कि उसका नाम श्री गुप्त था अथवा केवल गुप्त। उसका कोई भी लेख, सिक्का नहीं मिलता दो मोहरें हैं जिनमें से एक के ऊपर संस्कृत तथा प्राकृत मुद्रा लेख गुप्तस्य तथा दूसरे के ऊपर संस्कृत में श्रीगुप्तस्य अंकित है, उससे संबंधित की जाती है परंतु इस संबंध में हम निश्चित रूप से कुछ भी नहीं कह सकते।

गुप्त वंश का दूसरा शासक महाराज घटोत्कच हुआ जो श्री गुप्त का पुत्र था। प्रभावती गुप्ता के पूना अभिलेख में उसे ही गुप्त वंश का प्रथम शासक बताया गया है। स्कंदगुप्त के सुखिया के लेख में भी गुप्तों की वंशावली घटोत्कच के समय से ही प्रारंभ होती है, इस आधार पर कुछ विद्वानों का सुझाव है कि घटोत्कच  ही इस वंश का संस्थापक था। तथा  गुप्त के नाम का आविष्कार गुप्त वंश की उत्पत्ति बताने के लिए कर लिया गया होगा, किंतु इस प्रकार का निष्कर्ष तर्कसंगत नहीं है गुप्त लेखों में इस वंश का प्रथम शासक श्री गुप्त को कहा गया है ऐसा प्रतीत होता है कि यद्यपि गुप्त वंश की स्थापना श्री गुप्त ने की थी किंतु उसके समय में यह वंश पूर्ण महत्वपूर्ण स्थिति में नहीं था घटोत्कच के काल में ही सर्वप्रथम गुप्ता ने गंगा घाटी में राजनीतिक सत्ता प्राप्ति होगी। सर्वप्रथम चंद्रगुप्त प्रथम ने ही गुप्त वंश को  अधीनता से मुक्त किया था। इस प्रकार इन विविध मत  के बीच यह निश्चित रूप से बता सकना कठिन है कि प्रारंभिक गुुप्त नरेश किस सार्वभौम शक्ति की अधीनता स्वीकार करते थे।

Posted on by