स्वतंत्र भारत का प्रथम दिन (15 अगस्त, 1947)

15 अगस्त 1947 को एक नए युग की शुरुआत हुई जो नवीन भारत के दृष्टिकोण से व्याप्त था। यह दिन दासता के औपनिवेशिक शासन के अंत का प्रतीक और भारत की स्वतंत्रता के प्रारंभ का साक्षी था। 14 अगस्त, 1947 को संविधान सभा में आधी रात को आयोजित एक समारोह में स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री के तौर पर बोलते हुए जवाहरलाल नेहरू ने "भाग्य से गुप्त भेट" नामक ऐतिहासिक भाषण दिया। नेहरू ने भाषण देते हुए कहा कि आज हम दुर्भाग्य के एक युग का अंत कर रहे हैं, और भारत पुनः खुद को खोज पा रहा है। आज हम जिस उपलब्धि का उत्सव मना रहे हैं, वह महज एक कदम है। नए अवसरों के खुलने का इससे भी बड़ी जीत और उपलब्धियां हमारी प्रतीक्षा कर रही हैं। भारत की सेवा का अर्थ है लाखों करोड़ों पीड़ितों की सेवा करना। इसका अर्थ है गरीबी अज्ञानता और अवसर की असमानता को मिटाना। आज एक बार फिर वर्षों के संघर्ष के बाद भारत जागृत और स्वतंत्र है। भविष्य हमें बुला रहा है। हमें किधर जाना चाहिए, और क्या करना चाहिए, जिससे हम आम आदमी किसानों और कामगारों के लिए आजादी और अवसर ला सके। हम एक समृद्ध लोकतांत्रिक और प्रगतिशील देश बना सकें। हमें सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक संस्थाओं को बना सके, जो प्रत्येक व्यक्ति के लिए जीवन की पूर्णता और सुनिश्चित कर सके। कोई भी देश तब तक महान नहीं बन सकता, जब तक उसके लोगों की सोच या कर्म संकीर्ण है।
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