महात्मा गांधी की हत्या( 30 जनवरी, 1948)

30 जनवरी 1948 को बिरला भवन में नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी की हत्या कर दी। इस घटना से पूरे देश को झटका लगा, और राष्ट्र निर्माण के कार्य की गति अवरुद्ध हो गई। सांप्रदायिकता एवं राष्ट्रवाद की अस्पष्ट अवधारणा के वशीभूत नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी की हत्या की। ऑल इंडिया रेडियो पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने कहा 'हमारे जीवन से प्रकाश चला गया और हर तरफ अंधेरा छा गया'। उन्हें उनकी यादों को हमारी सर्वश्रेष्ठ श्रद्धांजलि होगी कि हम स्वयं को सत्य को समर्पित करें, जिसके लिए वे जिए और मरे। 4 फरवरी, 1948 को सरदार पटेल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को प्रतिबंधित कर दिया। 1949 में आरएसएस से उस समय प्रतिबंध हटाया गया, जब उन्होंने पटेल द्वारा प्रस्तुत शर्तों को स्वीकार कर लिया। ये शर्ते थी-(1) संघ एक लिखित एवं प्रकाशित संविधान को स्वीकार करेगा।(2) यह स्वयं को मात्र सांस्कृतिक गतिविधियों तक सीमित रखेगा और राजनीति से नहीं जुड़ेगा। (3)हिंसा एवं गोपनीयता के अपने एजेंडे का त्याग करेगा। (4)भारत के संविधान और ध्वज को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करेगा।(5) लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुरूप स्वयं को संगठित करेगा। आज का आरएसएस विभिन्न मोर्चों पर 1940 के आरएसएस से भिन्न है।
Posted on by