प्रथम भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 8 दिसम्बर, 1951 को भारत की संसद में पहली पंचवर्षीय योजना प्रस्तुत की थी। यह योजना हैरड़ -डोमर मॉडल पर आधारित थी। योजना में, मुख्य रूप से कृषि क्षेत्र को ध्यान में रखा गया था। इसमें बांधों और सिंचाई के क्षेत्र में निवेश पर ज्यादा ध्यान दिया गया था। कृषि क्षेत्र पर सबसे ज्यादा बिपरीत प्रभाव भारत के विभाजन सेपड़ा। पहली योजना में INR 2,069 करोड़ रुपये का कुल योजना बजट सात व्यापक क्षेत्रों को आवंटित किया गया था: सिंचाई और ऊर्जा (27.2 प्रतिशत), कृषि और सामुदायिक विकास (17.4 प्रतिशत), परिवहन और संचार (24 प्रतिशत), उद्योग (8.4 प्रतिशत), सामाजिक सेवाएँ (16.64 प्रतिशत), भूमि पुनर्वास (4.1 प्रतिशत), और अन्य क्षेत्रों और सेवाओं के लिए (2.5 प्रतिशत )।
» सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के विकास का लक्ष्य 2.1% वार्षिक था, जबकि हासिल की गई विकास दर 3.6% थी। इस योजना में कुल घरेलू उत्पाद 15% बढ़ गया। अच्छे मानसून के कारण अपेक्षाकृत उच्च फसल की पैदावार हुई, मुद्रा भंडार तथा प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि हुई, (जो 8% बढ़ी थी)। जनसँख्या वृद्धि की दर, प्रति व्यक्ति आय से अधिक की थी, जिसके कारण देश में नकारात्मक माहौल पैदा हुआ। साथ ही कई सिंचाई परियोजनाएं जिसमें भाखड़ा बांध और हीराकुंड बांध भी शामिल हैं इस अवधि के दौरान शुरू किए गए थे।