वैदिक सभ्यता प्रमुख यज्ञ ( Chief sacrifice of Vedic civilization )
अग्निहोष्टम यज्ञ:-पापों के क्षय और स्वर्ग की ओर ले जाने वाले नाव के रूप में वर्णित।
सौत्रामणी यज्ञ:-यज्ञ में पशु एवं सूरा की आहुति।
पुरुषमेधयज्ञ:-पुरूषों की बलि, सर्वाधिक 25 यूपों ( यज्ञ स्तम्भ) का निर्माण ।
अश्वमेघ यज्ञ:- सर्वाधिक महत्वपूर्ण यज्ञ, राजा द्वारा साम्राज्य की सीमा में वृद्धि के लिए,सांडों तथा घोड़ों की बलि।
राजसूय यज्ञ:- राजा के राज्य अभिषेक से संबधित।
वाजपेय यज्ञ:- राजा द्वारा अपनी शक्ति के प्रदर्शन के लिए, रथ दौड़ का आयोजन।
ऋग्वेद में उल्लिखित विभिन्न शब्द
पिता ?335 , जन ?275 , इन्द्र ?250 , माता ?234 , अश्व ?215 , अग्नि ?200 , गाय ?176 , विश ?170 , सोम?144 , विद्थ ?122 , बिष्णु?100 .गण ?46 , ब्रज (गौशाला )?45 , कृषि ?33 , वरूण ?30 , वर्ण ?23 , सेना ? 20 , ब्राह्मण ?15 , ग्राम ?13, बृहस्पति?11 , राष्ट्र ?10 , क्षत्रिय ?9 , समिति ?9 , सभा ?8 , यमुना ?3 , रूद्र ?3 , वैश्य ?1 , शूद्र ?1 , गंगा ?1 , राजा ?1 ,पृथ्वी ?1
ऐतरेय ब्राह्मण में दी गई शासन प्रणाली ??
पूर्व – साम्राज्य – सम्राट
पश्चिम – स्वराज्य – स्वराट
उत्तर – वैराज्य – विराट
दक्षिण – भोज्य – भोज
मध्यदेश – राज्य – राजा
शतपथ ब्राह्मण
राजा के राष्ट्र शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम शतपथ ब्राह्मण में किया गया है
पुनर्जन्म का सिद्धांत, पुरुरवा उर्वशी संवाद ,जलप्लावन की कथा ,राम कथा ,अश्विनी द्वारा च्वयन ऋषि को योवनदान
सदानीरा नदी का उल्लेख
आर्यों को नर्मदा नदी की जानकारी थी, 12 रतनिया का उल्लेख ,कृषि संबंधी समस्त क्रियाओं का वर्णन शतपथ ब्राह्मण में
ब्याज पर उधार देने वालों को कुसीडीन, का का उल्लेख
एक स्थान पर इंद्र के लिए सुनासीए(हलवाहा) नाम का उल्लेख शतपथ ब्राह्मण में
पत्नी को अर्धांगिनी बताया गया है शतपथ ब्राह्मण में, राजसूय यज्ञ का वर्णन भी शतपथ ब्राह्मण में
कुरु व पांचाल को वैदिक सभ्यता के सर्वश्रेष्ठ प्रतिनिधि शहर बताए गए हैं शतपथ ब्राह्मण
चारों वर्णों की अंत्येष्टि के लिए चार अलग-अलग स्थानों का विभाजन शतपथ ब्राह्मण में
क्षत्रियों को ब्राह्मणों से श्रेष्ट बताया गया है शतपथ ब्राह्मण में