सामान्य कीमत स्तरों में होने वाली वृद्धि को ही हम महंगाई या मुद्रास्फीति कहते हैं । मुद्रास्फीति दो कारण से उत्पन्न होती हैं - पहला मुद्रा के प्रसार में वृद्धि तथा दूसरा वस्तु के उत्पादन में कमी । उदाहरण स्वरूप अगर रिजर्व बैंक ने मुद्रा के प्रसार में वृद्धि कर दी जिससे लोगों को पहले की अपेक्षा अधिक आय प्राप्त होने लगेगी, परंतु वस्तु का उत्पादन स्थिर रहता है जिससे वस्तु का मूल्य उसकी मांग बढ़ने से अधिक हो जाएगा ।
इस प्रकार मुख्य वृद्धि दर को मांग जनित मुद्रास्फीति कहते हैं । वहीं दूसरी ओर यदि लोगों की आय स्थिर रहे लेकिन वस्तु का उत्पादन कम हो जाए जिससे अन्य विनिर्मित वस्तुओं की लागत बढ़ जाती है और अंततः वस्तु के मूल्य में वृद्धि हो जाती है इसे लागत जन्य मुद्रास्फीति कहते हैं ।
रिजर्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों के नगद कोष अनुपात तथा वैधानिक तरलता अनुपात का निर्धारण करता है । प्रत्येक बैंक को नई शाखाओं की स्थापना तथा अपनी पुरानी शाखाओं के स्थान पर परिवर्तन के लिए रिजर्व बैंक से अनुमति लेनी पड़ती है । किसी बैंकिंग कंपनी का दूसरी कंपनी के साथ एकीकरण करने के लिए रिजर्व बैंक की स्वीकृति प्राप्त करना आवश्यक है । विशेष परिस्थितियों में रिजर्व बैंक किसी बैंक के अनिवार्य समापन के लिए उच्च न्यायालय में आवेदन कर सकता है ।