जोखिम पूंजी, 12वी पंचवर्षीय योजना का मुख्य उद्देश्य ,भुगतान संतुलन, सीमांत स्थाई सुविधा दर, तथा निवल मांग और सावधि देयताएं के संबंध में कुछ तथ्य ।

जोखिम पूंजी

जब कोई उद्यमी बाजार में प्रथम बार प्रवेश करता है तथा अपने उद्यम के लिए प्रारंभिक पूंजी, निवेशकर्ताओं एवं कंपनियों से दीर्घकाल के लिए प्राप्त करता है तो इस प्रकार की पूंजी के डूबने की संभावना अधिक होती है अत: इसे जोखिम पूंजी कहते हैं ।

भुगतान संतुलन
भुगतान संतुलन खाते के दो भाग होते हैं - चालू खाता और पूंजी खाता । चालू खाते के अंतर्गत वस्तुगत व्यापार (आयात -निर्यात) के साथ- साथ अदृश्य मदों (बीमा, परिवहन, पर्यटन, उपहार आदि) देनदारियां, व लेनदारिया सम्मिलित की जाती हैं ।

सीमांत स्थाई सुविधा दर तथा निवल मांग और सावधि देयताएं

सीमांत स्थाई सुविधा(MSF) दर वर्ष 2011 में आरबीआई द्वारा शुरू की गई । इस सुविधा में (RBI) बैंकों की नकदी की कमी को पूरा करने के लिए अतिरिक्त रूप से होती है । यह दर रेपो दर से 1% ऊपर रहती है ।

अन्य

स्वाभिमान अभियान के तहत बैंक साथी शब्द का प्रयोग किया गया है । बैंक साथी एक प्रकार की बैंकिंग सेवा है, जिसके तहत ग्रामीण इलाकों में यह ग्रामीण लोगों और बैंकों के बीच मध्यस्थ के रूप में कार्य करते हैं । यह दूरस्थ इलाकों में लाभार्थियों को धनराशि जमा करने व आहरण करने योग्य बनाते हैं साथ ही सरकारी सब्सिडी और सामाजिक सुरक्षा का लाभ सीधे गांव में उनके खातों द्वारा प्रदान करते हैं ।

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