भारत बौद्ध धर्म की जन्म स्थली है पांचवी है, पांचवी सदी ईसा पूर्व में गौतम बुद्ध द्वारा संस्थापित बौद्ध धर्म को राजधर्म और विश्व धर्म बनाने में सम्राट अशोक तथा कनिष्क ने महान योगदान दिया। यह जाति एवं वर्ग जनित भेदभाव को स्वीकार नहीं करता है जिसके फलस्वरुप यह शीघ्र ही काफी लोकप्रिय हो गया। इन सम्राटोंं ने अन्य देशों मेेंं धर्म के प्रचार के लिए सहायता प्रदान की और बौद्ध भिक्षुकोंं को समीपवर्ती देशों -श्रीलंका बर्मा (म्यांमार) दक्षिण पूर्वी एशिया आदि देशोंं में भेजा। कालक्रम में बौद्ध धर्म श्रीलंका, बर्मा, मध्य एशिया, तिब्बत और चीन तथा वहां से कोरिया और जापान में फैल गया सातवीं शताब्दी तक इन सभी प्रदेशों में बौद्ध धर्म का प्रचार हो गया था बौद्ध धर्म चीन में पहले से प्रचलित कनफ्यूशियस और ताओवाद से भिन्न है।
जापान में छठींं शताब्दी के पश्चात शिन्टोवाद का प्रचार हुआ बाद में बौद्ध धर्म इससे मिल गया शिन्टो धर्म में कई देवताओं की पूजा मंदिरों में की जाती है। बहुत से जापानी दोनों ही पवित्र स्थान पर पूजा एवं आराधना करते हैं। चीन की भाति मंगोलिया, कोरिया तथा दक्षिण पूर्वी एशिया के कुछ देशों में धर्म विरोधी आंदोलन हुए हैं वहां धर्म को काफी हानी उठानी पड़ी है इससे अनेक धर्म स्थल तथा इमारतें नष्ट हुई हैं तथा बौद्धोंं की संख्या में भी कमी आयी है बौद्ध धर्म की जन्म स्थली को भारत में अत्यंत प्राचीन सनातन तथा सशक्त हिंदू धर्म द्वारा दबा दिया गया और वह उसके सम्मुख नहीं टिक पाया परिणाम यह हुआ कि राजाओं के आश्रय में पनपे बौद्ध धर्म का प्रभाव भारत में अत्यल्प रह गया डॉ. आंबेडकर से प्रेरित होकर महाराष्ट्र मध्य भारत में धर्मांतरण द्वारा बौद्ध बने परिवारों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है, वर्तमान में विश्व भर में कुल 35.6 करोड़ बौद्ध धर्मानुयायी हैं जो कुल जनसंख्या का 5.8 प्रतिशत एशिया में बौद्ध धर्म के अनुयाई दक्षिण एशिया (भारत, नेपाल, श्रीलंका) दक्षिण पूर्वी एशिया में (म्यांमार, थाईलैंड, कंबोडिया, वियतनाम) मध्य एशिया (तिब्बत) पूर्वी एशिया (चीन, जापान, कोरिया, ताइवान, मंचूरिया, मंगोलिया) आदि के विस्तृत भूभाग में फैले हैं।