- जैन शब्द संस्कृत के जिन शब्द से बना है जिसका अर्थ विजेता होता है । जैन महात्माओं को निरग्रंथ अर्थात बंधन रहित व जैन धर्म के अधिष्ठाता तीर्थंकर कहा गया है।
- जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव या आदिनाथ थे अरिष्ट नेम का उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है।
- 22 वें तीर्थंकर अरिष्टनेम को भी वासुदेव कृष्ण का भाई बताया गया है ।
- जैन धर्मावलंबियों का विश्वास है कि उनके सबसे महान धर्म उपदेशक महावीर थे इसके पहले 23 और आचार्य हुए हैं जो तीर्थंकर कहलाते थे।
- धर्म के प्राचीनतम सिद्धांतों के उपदेशक, तीसरे तीर्थंकर पार्श्वनाथ माने जाते हैं जो वाराणसी के निवासी थे ।
- जैनों के अनुसार पार्श्वनाथ को 100 वर्ष की आयु में सम्मेद पर्वत पर निर्वाण प्राप्त हुआ ।
- पारसनाथ द्वारा प्रतिपादित 4 महा व्रत इस प्रकार हैं सत्य, अहिंसा ,अपरिग्रह तथा अस्तेय।
- यथार्थ में जैन धर्म की स्थापना उनके आध्यात्मिक शिष्य वर्धमान महावीर ने की थी वर्तमान महावीर का जन्म 540 साल ईसा पूर्व में वैशाली के निकट कुंड ग्राम में हुआ था।
- इनके पिता का नाम सिद्धार्थ था जो वज्जि संघ के क्षत्रिय कुल से प्रधान थे इनकी माता का नाम त्रिशला था जो लिछवि शासक चेतक की बहन थी ।
- महावीर की पत्नी का नाम यशोदा था।
- महावीर सत्य की खोज में 30 वर्ष की अवस्था में सांसारिक जीवन का परित्याग कर सन्यासी हो गए जब 42 वर्ष की अवस्था में उन्हें कैवल्य प्राप्त हो गया तो उन्होंने वस्त्रों का पूर्ण रूप से त्याग कर दिया ।
उन्होंने सुख-दुख पर विजय प्राप्त की , इसी विजय के कारण महावीर अर्थात महान सूर या जिन (विजेता) कहलाए ।
- उनके अनुयाई जैन कहलाते हैं।
- महावीर को निर्वाण की प्राप्ति 468 ई सा पूर्व में 72 वर्ष की उम्र में वर्तमान के राजगीर के समीप पावापुरी में हुआ था।