सरकार ने आरबीआई अधिनियम की धारा 7 के तहत बाजार में तरलता की कमी के बारे में अपनी चिंताओं को संबोधित करने के लिए केंद्रीय बैंक से परामर्श मांगने के लिए उसे हाल ही में 3 पत्र भेजे इनमें सरकार ने कमजोर बैंकों को नगदी मुहैया कराने छोटे और मध्यम उद्योगों को कर्ज देने और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए नगदी जैसे मुद्दों पर आरबीआई को समाधान करने को कहा ।
आरबीआई अधिनियम की धारा 7 केंद्र सरकार को सार्वजनिक हित में आरबीआई को निर्देश जारी करने की शक्ति प्रदान करती है। हालांकि, इस खंड का अभी तक सरकार द्वारा प्रयोग नहीं किया गया है । धारा 7 में दो भाग हैं - परामर्श तथा आरबीआई को सार्वजनिक हित में कुछ कार्रवाई करने के लिए निर्देश जारी करना । सरकार व केंद्रीय बैंक के बीच वर्तमान में जारी तनाव को देखते हुए यह संभावना जताई जा रही थी कि सरकार आरबीआई एक्ट की धारा 7 के तहत केंद्रीय बैंक को निर्देश जारी कर सकती है । हालांकि, ऐसा नहीं हुआ रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक्ट 1934 की धारा 7 के तहत सरकार को यह अधिनियम दिया गया है कि वह नीतिगत मुद्दों पर रिजर्व बैंक के साथ सलाह मशविरा करके उसे दिशा निर्देश दे सकती है इस एक्ट की धाराएं इस प्रकार हैं-
1. धारा 7(1) इसके तहत केंद्र सरकार रिजर्व बैंक के गवर्नर से परामर्श करके बैंक को ऐसे दिशा-निर्देश दे सकती है जो जनता के हित में आवश्यक हो ।
2.धारा 7(2) ऐसे किसी भी दिशा निर्देश के बाद, रिजर्व बैंक के कार्य एक केंद्रीय निदेशक मंडल को सौंप दिए जाएंगे । यह निदेशक मंडल, बैंक की सभी शक्तियों को उपयोग कर सकता है ।
3. धारा 7(3) के तहत रिजर्व बैंक के गवर्नर और उसकी अनुपस्थिति में नामित डिप्टी गवर्नर की मौजूदगी में भी केंद्रीय निदेशक मंडल के पास बैंक के समान मामलों और कामकाज के अधीक्षण और निर्देशन की शक्तियां होंगी और वह उन सभी शक्तियों का इस्तेमाल कर पाएगा जो कि आरबीआई के पास होती है